महांकाल की भस्मारती - क्यों और कबसे शुरू हुई?
महांकाल की भस्मारती – क्यों और कबसे शुरू हुई?

आज हम आपको महांकाल की भस्मारती क्यों और कबसे की जाती है. सबसे पहले आपको बताते है महांकाल का ये मंदिर कहा है और ये किसलिए प्रसिद्ध है. महांकाल का ये मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्तिथ है. ये मंदिर अपने अलवकिक दृश्य और सौन्दर्य के लिए की भगवान शिव के महांकाल मंदिर के जाना जाता है. इस मंदिर की अगर मान्यता की बात करें तो भगवान शिव पुराणों में महाभारत में इस महांकाल के मंदिर की विस्तृत खुबसूरती से बताया गया है.

क्या होती है महांकाल की भस्मारती ?

देखा जाए तो भगवान शिव के पूजन में भस्म अर्पण करने का विशेष महत्व है. भस्म की आरती यहाँ की एक प्राचीन परंपरा में से एक रही है. ये मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्यूंकि पुरे विश्व में उज्जैन के इस महांकाल मंदिर में विशेष रूप से आरती की जाती है. शिवपुराण में ऐसा कहा गया है की भस्म से श्रृष्टि की रचना हुई और इसी भस्म में सभी को एक दिन विलीन हो जाना है. इसलिए इस श्रृष्टि के सार बने हुए भस्म को भगवान शिव हमेशा धारण किये हुए होते है. अब आपका सवाल होगा ये भस्म आरती बनती कैसे है. आइए जानते है.

भस्म बनाने के लिए कपिला गाय से बने गोबर के कंडे,पीपल,पलाश,बड,अमलतास और बेर के वृक्ष की लकड़ी को एक साथ जलाकर तैयार किया जाता है. इस दौरान मंत्रोच्चार उचित ढंग से किये जाते है और जो भस्म प्राप्त होती है उसे कपड़े से छान लिया जाता है. इस भस्म से प्रतिदिन महांकाल मंदिर में आरती होती है.

क्यों होती है भस्मारती ?

भस्मारती को भगवान शिव का श्रृंगार और उन्हें जगाने की विधि भी बताई गई है. ये प्रतिदिन सुबह के 4 बजे किया जाता है. वर्षो पहले ऐसा माना जाता था की शमशान की भस्म से भगवान शिव की भस्म आरती की जाती थी. लेकिन अब ऐसा ना होकर कंडे के बने भस्म से भगवान शिव की भस्म आरती होती है. ऐसा भी कहा जाता है की भस्मारती के समय महिलाएं इसे नही देखती और इसलिए उन्हें घूँघट में भस्म आरती तक रहना पड़ता है. भस्म को विशेष महत्व माना गया है क्यूंकि भगवान शिव का विशेष प्रसाद है भस्म.

ऐसा भी कहा गया है जैसे भस्म से कई चीजे शुद्ध हो जाती है. वैसे ही भस्म का तिलक लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ-साथ कई जन्मो के पापों से भी मुक्ति मिलती है. इस भस्म को लगाने से शरीर के रोम छिद्रों को भर देती है जिससे आपको गर्मी में गर्म और ठण्ड में ठण्ड नही लगती.

क्यों होती है महांकाल में ही भस्मारती ?

उज्जैन में भगवान शिव के प्रकट होने और भस्मारती के होने में एक कथा प्रचलित है. दूषण नाम को सर्वनाश करने के लिए भगवान शिव यहाँ प्रकट हुए थे और जाकब भक्तो ने शिव भगवान से वही रहने का अनुरोध किया तो भगवान शिव ना प्रकट होकर ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ.

प्रमुख बिंदु :-

  • क्यों होती है भस्मारती?.
  • क्या है रहस्य?.

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