अक्सर कई ऐसे सवाल हमारे मन में होते हैं जिनका उत्तर हमारे पास नहीं होता है पर एकाएक कभी-कभी जिज्ञासा होती है की ऐसा क्यों होता है ऐसे में हम गूगल की मदद लेते हैं या किसी जानकार से पूछ ही लेते हैं ऐसे में आपको उत्तर मिल जाता है तो ऐसा ही एक सवाल मेरे मन में आज आया की भाई मंदिर के शिखरों पर कलश क्यों लगाया जाता है. ये क्यों जरुरी है? अब इस बात का उत्तर जब मैंने अपने एक जानकार अंकल से पूछा तो उन्होंने मुझे ये जवाब दिया कि.

मंदिर या देवालय ये वे स्थान हैं जहाँ आपको लगता है की यहाँ भगवान है. कोई दैवीय शक्ति तो है. जो आप महसूस कर सकते हैं. यहाँ जाकर जो आपको आत्मीय शांति प्राप्त होती ही है. इसकी वजह यह है की मंदिरों को एक अलग प्रकार से बनाया जाता है और इन मंदिरों के सबसे उपर शिखर पर कलश लगाये जाते हैं. अब इसका महत्त्व भी है? आखिर क्यों आप भी तो यही जानना चाहते हैं ना अब इसका धार्मिक महत्व क्या है में आपको बताता हूँ.

हिन्दू धर्म के अनुसार

हिन्दू धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है की कलश में ब्रह्मा, विष्णु और  महेश तीनों की शक्तियों का निवास होता है. इसलिए जब ये तीनो मंदिर के शीर्ष पर होते हैं तो इनकी कृपा चारों ओर फैले इसलिए मंदिरों के उपर कलश लगाये जाते हैं. इस बात को लेकर एक और अंकल ने मुझे एक और बात बताई की, एक और ऐसा तथ्य है की सीताजी की उदगम या उत्पत्ति भी कलश से ही मानी जाती है. इस कारण से कलश में तीनों देवों से मातृ शक्तियां भी कलश में निवास करती है. यही कारण है कि कलश को हिंदू धर्म में शुभ और पवित्रता का प्रतीक माना गया है. मंदिरों के शिखर पर कलश लगाने से उस स्थान पर त्रिदेव तथा मातृशक्तियों की विशेष कृपा बरसती है.

आपने शायद बड़े-बूढों से समुद्र मंथन के बारें में सुना हो तो समुद्र मंथन के समय प्राप्त अमृत भी कलश में ही था. प्राचीन मंदिरों या पुरानी तस्वीरों में भी माता लक्ष्मी को दो हाथियों द्वारा कलश जल से अभिषेक कराते हुए देखा जरुर होगा.

एक और कारण ये भी हो सकता है की जब इसमें देवी देवता का निवास हो सकता है तो जो लोग मंदिर नहीं जा पाते हैं तो मंदिरों को अगर दूर से ही देख लें जैसे की उनका शिखर तो वो दूर से ही मंदिर के दर्शन कर सकते हैं.

मंदिरों में क्यों शांति मिलती है

तो यही सभी कारणों के कारण शायद हम मंदिरों के शीर्ष पर या शिखर पर कलश रखते हैं. और शायद इसी वजह से मंदिर आने वाले सभी लोगों का विश्वास होता है की भगवान सब ठीक कर देगा. यहाँ आके आपको शांति मिलती हैं और आपको धेर्य भी प्राप्त होता है और लोगो को उर्जा के साथ समाधान भी प्राप्त हो जाता है.

इसलिए मंदिरों में आपको अपने आस-पास हमेशा आपको एक अलग उर्जा लगती हैं आपका सिर वहां झुक ही जाता है. आपको विश्वास अपने आप होने लगता है की यहाँ कुछ शक्ति जरुर है. यह बुरी एनर्जी को दूर करता है. इसी वजह से मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के दिमाग से नकारात्मक विचार निकल जाते हैं और उनके विचार शुद्ध तथा सकारात्मक हो जाते हैं. कलश इस ऊर्जा के लिए एक एंटिना का कार्य करता है. कलश मंदिर के चारों ओर की इस ऊर्जा को संग्रहित करके मंदिर के अन्दर संचारित कर देता है. जिस वजह से आपको ऐसा लगता है और आपको शांति की प्राप्ति होती है. जिस वजह से मंदिरों में या उसके आसपास आने वाले सभी लोगों पर और सभी जीवों पर एक अलग दैवीय प्रभाव पड़ता है.

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