मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए

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मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए
मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए

मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए

    मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए

आज अगर बात करें क्या हर-हर मोदी घर-घर मोदी का नारा बंद हो गया है ?. क्या लोग अब ये समझने लगे है की मोदी के वादे बस एक कोरा कागज के अलावा और कुछ भी नही रहे. कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल से देश के सभी लोग बेचैन हो गए थे. चाहे भ्रष्टाचार की ही बात क्यों ना करें. मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में कई सारे मनभावन वादे किए, लेकिन आजतक वो वादे कहाँ गए ये देशवासियों से बेहतर और कोई नही जानता. आज बात करेंगे मोदी के वादे जो बस चुनावी सभाओं तक रहे फिर ईद का चाँद हो गए, ओझल हो गये विलुप्त हो गए. जनता ने इन वादे पर विश्वास करके मोदी को कमान दी थी.

1. मेक इन इंडिया का नाम हुआ रेप इन इंडिया :-

अगर बात करें मेक इन इंडिया की तो इसके तहत बाहर की यानि की विदेशों की जितनी कंपनी है अगर भारत में आकर निवेश करना चाहती है तो कर सकती है. इसके तहत मोदी जी ने जनता को चुनावी वादे में आश्वस्त  किया था की हर साल 2 करोड़ नौकरियाँ निकाली जाएँगी युवाओं के लिए. अगर बात करें मेक इन इंडिया की तो अब तक ऐसा कुछ होता दिखाई नही दे रहा है.

मेक इन इंडिया का तो कुछ हो ना सका,रेप इन इंडिया जरुर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. मेक इन इंडिया के तहत मोदी ने  जापान से समझौता किया जिसमे लागत लगेंगे 1,00000 करोड़ में और किसके लिए तो बुलेट ट्रेन के लिए. आए दिन ट्रेनों के पलटने की घटनाएँ आती रहती है. क्या उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए मोदी जी आपने कुछ किए. ये बुलेट ट्रेन चलेगी मुंबई से अहमदाबाद तक क्या पुरे देश की जनता को लाभ मिलेगा?. बिलकुल नही मुंबई से अहमदाबाद के लोगों तक ही ये सिमित है.

बीते 3 सालों में रेप की वारदाते देश के हर एक हिस्से से आई है ,जो की अत्यंत दुखदायी है. क्या मोदी मेक इन इंडिया में और विदेशी यात्रा में इतने व्यस्त हो गए है की उन्हें देश में हो रहे रेप की धटनाओं को अंकुश लगाने भर का समय नही?. जनता ने जिस भरोसे की नीव पर मोदी को प्रधानमंत्री बनाया था,उस भरोसे को नरेन्द्र मोदी चकनाचूर करते हुए नजर आ रहे है.

  1. पाकिस्तान पर सख्ती से धावा बोलेंगे :-

    चुनावी वादे में कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल में हुए नाकाम कामों को गिनाया और साथ ही ये वादा किया अगर जनता उन्हें मौके दे तो वो पाकिस्तान से सख्ती से निबटेंगे. ऐसा कुछ होता बिलकुल दिखाई नही दिखाई दे रहा है. बजाय इसके मोदी  पाकिस्तान की बात पर छुप्पी साधे बैठी है. पाकिस्तान अपनी घुसपैठ गतिविधि को जम्मू कश्मीर में समय-समय पर कोशिशे करता रहा है.

  2. कालाधन वापस लाओ बस जुमला बनकर रह गया :-

    कालेधन पर नरेन्द्र मोदी ने ना जाने कितने सारे वादे किए,यहाँ तक नरेन्द्र मोदी ने ये तक कह डाला अगर कला धन भारत वापस आएगा तो सबका भला होगा. ना ही कला धन वापस आया और ना ही किसी को पैसा मिला. पैसे की धांधली करने वाले जैसे नीरव मोदी से लेकर मेहुल चौकसी सभी के सभी कहा है कब पकड़े जाएंगे कोई नही जानता. काला धन का जुमला हुआ फेल. ये दिलासा नही तो और क्या थी?.

  3. किसानों के अकाउंट में पैसे तो नही आए अकाउंट खाली रह गए :-

    नरेंद्र मोदी ने बढ़ चढ़कर चुनावी वादे किए जिसमे ये तक कहा गया हर किसानों के अकाउंट में हर लोगों के अकाउंट में आएंगे. काले धन की तर्ज पर उन्होने कहा था जैसे ही काला धन भारत में आ जाएगा,किसानों के अकाउंट पैसे से भर जाएंगे. मोदी जी के यहाँ तक किसानों से किए वादे टूट गए शीशे की तरह. वो गाना है ना शीशा हो या दिल हो टूट जाता है …टूट जाता है …टूट जाता है. आए दिन किसान आत्महत्या कर रहे है. अगर मोदी किसानों का भला नही करेंगे तो कौन करेंगा. किसान भारत देश की पहचान है. भारत देश को कृषि मूल देश जाना जाता है.

  4. 60 महीने में ना ही तस्वीर बदली ना ही तक़दीर :-

    मोदी ने अपने चुनावी भाषण में कहा था अगर जनता उन्हें 60 महीने की मोहलत देती है तो मोदी भारत देश की तस्वीर भी बदल देंगे और तक़दीर भी. ऐसा कुछ नही हुआ तक़दीर तो भारत की जनता से चल रही रही है और भारत को सोने की चिड़ियाँ कहा जाता है. तस्वीर भारत की मोदी जी नही बदल सकते वादे बस चुनावी समय तक थे शायद मोदी जी भूल रहे है अगर आज वो जहाँ बैठे है वो कुर्सी जनता ने दिलाई है ये बात मोदी जी अपने मन और दिमाग में बैठा ले.

  5. प्रधानमंत्री ना बनाकर बनाए चौकीदार ,पर बने विदेशी देशों के चौकीदार :-

    चुनावी भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक भाषण दिया था जिसमे उन्होंने कहा था भरता की जनता अगर प्रधानमंत्री नही बनाना चाहती तो कोई बात नही,भारत की जनता उन्हें भारत का चौकीदार बनाए वो खुशी से भारत के लोगों की सेवा करेंगे. अगर बात इस मुद्दे की करें तो भले ही वो भारत के प्रधानमंत्री बन गए हो लेकिन विदेशों की चौकीदारी करने में खासा अनुभव है मोदी को. विदेशी देशों ने चौकीदारी का पूरा दायित्व नरेन्द्र मोदी को दे रखा है.

  6. गाँव-गाँव तक बिजली देने का वादा हुआ फेल :-

    अभी तक अगर सर्वेक्षण की बात करें तो बहुत सारे गाँव में बिजली नही पहुच पाई है. 3 साल हो गये मोदी को सरकार में रहे. चुनावी घोषणाओं में मोदी ने वादा किया था हर गाँव-गाँव तक बिजली को उपलब्ध कराया जाएगा. ये बुनियादी सुविधाएं भी मोदी दिलाने में नाकाम साबित हुए है.

  7. गंगा की सफाई ना होकर पैसे की हुई सफाई :-

चुनावी भाषणों में मोदी जी ने गंगा की सफाई को लेकर ढेर सारे वादे किए. सत्ता में आने के बाद मोदी ने यहाँ तक गंगा सफाई के लिए अलग-अलग कमिटी बनाई,कितनी सारी परियोजना बनाई. अगर बात करें उन परियोजना में लगे पैसे की तो गंगा की सफाई तो भूल ही जाइए,उन पैसो की सफाई भले अच्छे तरीके से हो गई. जिस तरीके से मोदी ने अपने भाषणों में एक छवी जागृत हुई थी भारत के उज्जवल भविष्य की वो ख़त्म होता हुआ दिखाई दे रहा है. माँ गंगा आज भी मैली है मोदी जी ,माँ गंगा आज भी आपको पुकारती है कम से कम ऐसा झूठ माँ से तो ना बोले होते.

  1. नोटबंदी और जीएसटी की मार :-

    अचानक माननीय प्रधानमंत्री ने नोटबंदी करा दी. जिससे लोगों को घंटो लाइन में खड़े रहने पड़े. कितने लोगों ने इस लाइन में अपनी जान भी गवानी पड़ी. नोटबंदी की मार आज भी देश के कई हिस्सों में देखने को मिल रही है. नोटबंदी ऐसा समय था जिसमे लोग अपने अपने अकाउंट में जमा राशी को भी निकालने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ये कैसा न्याय है मोदी जी का. जीएसटी की मार से आज भी व्यापारी वर्ग सहमा हुआ है डरा हुआ है. व्यापारी वर्ग को भारतीय जनता पार्टी का वोट बैंक कहा जाता है. मोदी जी तो अपने लोगों को भी लेपेते में लिया,जिससे व्यापारी वर्ग आज भी त्रस्त है.

  2. अच्छे दिन के वादे जो कभी पुरे नही हुए :-

    मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए
    मोदी के वादे कोरा कागज बनकर रह गए

    ये नया लोकसभा चुनाव में बहुत प्रचलित हुआ,लेकिन अगर बात करें क्या कभी अच्छे दिन आए भी या नही तो ऐसा नही हुआ अगर बात करें अभी तक की वो तो बिलकुल नही हुआ. इस अच्छे दिनों में मोदी ने किसानों के कर्ज माफ़ी से लेकर,मिर्च की कीमत में गिरावट तक,डीजल,पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से लेकर सारे वादे फेल हुए. ना ही महंगाई कम हुई और ना ही किसानों का दर्द कम हुआ. अगर फायदा हुआ तो मोदी जी बताए इस फायदे के पैसे कहा गए. सारे पैसे चौकीदारी करने में खत्म हो गए या कहा खत्म हो गए मोदी जी बताए. भले मोदी जी जवाब देने की स्तिथि में ना हो ,मगर किए गए वादे तो निभाएं.

  3. राम मंदिर को बनाने का वादा :-

देश का सबसे चर्चित मुद्दा राम मंदिर, जिसके निर्माण का वादा मोदी जी और उनकी सरकार ने देश के सभी हिन्दुओ के वोट हासिल करने के लिए कई बार किया था. सत्ता में आये हुए तीन साल पूरे हो गए और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की नींव भी नही रखी गई है.बताए मोदी जी कब बनेगा राम मंदिर?. यह एक ऐसा चुनावी वादा है जो भाजपा अपने हर चुनाव के समय इस्तेमाल करती है और इस वादे से देश के हिन्दुओ को धर्म के नाम पर कई बार उल्लू बनाया और इसमे कोई दोमत नही की आगे भी बीजेपी ऐसा करने में कोई कसर नही छोड़ेगी.

  1. स्मार्ट सिटी तो नही बनाया स्मार्ट बेवकूफ जरुर बनाया :-

    वादों और मोदी जी से दूर-दूर तक कोई तालुक्क नही है. प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने देश के विभिन्न शेहरों को स्मार्ट सिटी बनाने को कहा था. ये तो कुछ भी नही स्मार्ट सिटी के नाम पर नरेन्द्र मोदी की आई टी सेल की टीम ने यहाँ तक कई बार फोटोशॉप करके जनता को बेवकूफ बनाने में कोई कमी नही छोड़ी.

  2. अर्थव्यवस्था की विकास दर ना ही तेजी से बढ़ी वादे अधूरे रह गए :-

    विकास दर की बात करें तो नरेंद्र मोदी ने चुनाव में दावा किया था कि यह दर बढ़ाकर 10 फीसदी कर हो जाएगी. उन्होंने इसे बहुत जरूरी बताते हुए कहा था कि ऐसा होने से लोगों की समृद्धि बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. लेकिन एक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में देश की विकास दर मुश्किल से 7.5 फीसदी तक जाएगी. यह आंकड़ा मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अंतिम वर्षो की विकास दर 6.9 फीसदी (संशोधित) से थोड़ा ही ज्यादा होगा. यानी जी-तोड़ कोशिश के बाद भी सरकार विकास दर बढ़ाने का अपना वादा पूरा करने में नाकामयाब रही है.

  3. बुनियादी जरुरत जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य भी नही हुए पुरे :-

    भारत सरकार लोगों को बुनियादी जरुरत भी दिला पाने में नाकाम रही है. चाहे बात शिक्षा की ही क्यों ना करें. हाल के दिनों में परीक्षा पेपर में हुए धांधली को ही ले. इसमे छात्रों की क्या गलती है ?. एसएससी के पेपर में हुई धांधली की बात करें. ये सारी परीक्षाएं भारत सरकार के अंतर्गत होती है. इस सभी परीक्षाओं में हुई धांधली के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वो कोई और नही मोदी और मोदी सरकार है.

अब बात करें स्वास्थ्य की उत्तर प्रदेश में दो दिनों में 17 बच्चों की हुई मौत कैसे हुई और उत्तर प्रदेश सरकार इतने समय में क्या करती रही,इसका आज तक कोई ब्योरा निकल कर नही आया. इन बच्चों की हुई मौत का जिम्मेदार और कोई नही मोदी और मोदी सरकार है. क्या उनकी जिंदगी वापस आ सकती है?. क्या मोदी सरकार इंसाफ दिला सकती है?.

  1. स्वच्छ भारत अभियान ब्रांड नही चला :-

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    स्वच्छ भारत अभियान एक बड़े ब्रांड के रूप उभरकर आया था ,जो बस एक ब्रांड बनकर रह गया. राज्य जैसे पंजाब,बिहार,दिल्ली,यूपी जैसे राज्यों में ये असफल रहा. बात स्वच्छता की नही बल्कि बात है जागरूकता की. अगर लोग जागरूक नही होंगे तो वो इस देश को स्वच्छ कैसे रखेगे. इस चीज को ना केवल भारत सरकार को समझनी होगी बल्कि देश के हर जनता को समझना होगा.
    जानकारी की माने तो ये अभियान 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गाँधी के जन्म दिवस पर शुरू किया गया था. भारत सरकार ने देश में स्वच्छता के लिए सर्विस टैक्स 0.5 प्रतिशत लगाया था. इस टैक्स से सरकार को सालाना 400 करोड़ रुपये मिलेंगे जो स्वच्छ भारत पर खर्च किए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता के लिए अब सर्विस टैक्स 14 प्रतिशत से बढ़कर 14.5 प्रतिशत कर दिया है.

  2. स्किल इंडिया में युवकों को नही मिला रोजगार :-

    रिपोर्ट की माने तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्किल इंडिया का उद्घाटन किया. ऐसा कहा गया की इस योजना में 24 लाख युवकों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही गई थी. इसके इलावा खेती करने वाले 26 करोड़ से ज्यादा युवाओं को इस योजना में शामिल तक नही किया गया. क्या यही इंसाफ है मोदी सरकार का?. खेती करने वाले किसानों के साथ ऐसा क्यों किया गया. ये स्किल इंडिया के जुमले बस और बस जुमले बनकर रह गए.

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