मोदी सरकार ने भगोड़े व्यवसायियों के लिए – जारी किया अध्यादेश

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मोदी सरकार ने भगोड़े व्यवसायियों के लिए – जारी किया अध्यादेश
modi sarkar ne jari kiya adhyadesh

बैंक को ठेंगा दिखाकर विदेश भाग जाने वाले व्यवसायियों की संपत्ति अब भारत सरकार जब्त करेगी. इस अध्यादेश पर मुहर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को लगा दिया. रिपोर्ट की माने तो इस अध्यादेश का नाम भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश 2018 लाने का निर्णय किया है. पंजाब नेशनल बैंक करोड़ो रुपए के हुए घोटाले को देखते हुए सरकार ने ये अध्यादेश लाया है. पीएनबी धोखाधड़ी में हिरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी 3,000 करोड़ रुपए पीएनबी को चपत लगाकर देश से भागे हुए है.

लोकसभा में पेश किया जा चुका है बिल :-

मोदी सरकार ने भगोड़े व्यवसायियों के लिए – जारी किया अध्यादेश
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रिपोर्ट की माने तो इस अध्यादेश का लाने मकसद है जो भी आर्थिक अपराधी है उन्हें भारतीय कानून क्षेत्र के अधिकार में लाया जाए तथा उनपर लगाम कसा जा सके. जानकारी की माने तो 12 मार्च को भगोड़ा आर्थिक बिल 2018 में पेश किया जा चुका है.

हंगामे की वजह से इस बिल को पास किया नही जा सका,जिसके चलते सरकार को इसे अध्यादेश के रूप में लाना पड़ा. अध्यादेश प्रावधान की माने तो डायरेक्टर या डिप्टी डायरेक्टर किसी को जिसने अपराध किया है उसे आर्थिक भगोड़ा अपराधी निश्चित तौर पर कर सकेंगे. इसके डायरेक्टर या डिप्टी डायरेक्टर को विशेष अदालत में याचिका दायर करानी होगी.

याचिका के बाद कैसे आगे बढ़ेगी जांच :-

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इसके ठीक बाद अपराधी के खिलाफ पर्याप्त सबूत देने होंगे. किसी भी अपराधी को भगोड़ा साबित करने में उस अपराधी के पते और खासकर कहाँ-कहाँ है ठिकाने और इसके साथ ही संपत्तियों की सम्पूर्ण जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी. इसके बाद जब्त किए जाने योग्य विदेशी संपत्ति और बेनामी संपत्ति की लिस्ट भी देनी होगी. आवेदन मिलने के 6 हफ्ते के अन्दर आरोपी को स्पेशल कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस निकाला जाएगा. इसके बाद अगर आरोपी तय जगह पर पेश हो जाता है तो कोर्ट भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल के तहत कार्यवाई नही करेगा.

कैसे जाने कौन है आर्थिक अपराधी :-

अध्यादेश में किसी व्यक्ति को आर्थिक अपराध का भगोड़ा घोषित करने के लिए धनशोधन कानून 2002 के तहत विशेष अदालत का प्रावधान किया गया है. आर्थिक अपराध का भगोड़ा उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसके खिलाफ अनुसूचित अपराध में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है और वह आपराधिक अभियोग से बचने के लिए देश से पलायन कर चुका है या विदेश में निवास कर रहा है और आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए भारत आने से इनकार करता है.

इस अध्यादेश में आर्थिक अपराध के तहत अपराधों की एक सूची दी गई है. साथ ही, ऐसे मामलों से अदालत पर बोझ नहीं बढ़े, इसलिए अध्यादेश के दायरे में सिर्फ उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जिनका कुल मूल्य 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो. सूत्रों के मुताबिक, अध्यादेश से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामले में कानून का अनुपालन दोबारा बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि आरोपियों को भारत लौटकर मामले में मुदकमे का सामना करने के लिए बाध्य किया जाएगा.

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