हर आंसू की कीमत देकर
आँखों का रंग सजाऊंगा,
मुस्कान भर कर होंठो पे,
हँस के मैं दर्द निभाउंगा.

छोड़ी है डोर प्रीत की मैने

हाथों में आई जीत भी मैंने,
अपनी नज़रों की आंखों से,
अपना चेहरा धुलवाऊंगा,
हंस के मैं दर्द निभाउंगा.

तूं जब भी मुड़ कर देखेगी,
मुझे पास खड़ा तूं पाएगी.

सुनी राहों की बाहों में,
रूखी रूखी सी बातों में,

ढूंढेगी खुद को दर्पण में,

जुल्फों सी उलझी उलझन में,
खुद को तन्हा जब पाएगी,
मुझे पास खड़ा तूं पाएगी.

मुझे पास खड़ा तूं पाएगी….

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