इस दुनिया में जहां चारो तरफ अनेको जातिय नफरत की भावनाएं दिखाई दे रही हैं वही देहरादून से एक खुशनुमा और प्रेरणादायी खबर सामने आयी है. हमारी सोच में तमाम विसंगतिया होने के बाद भी हम हर तरफ इस तरह के आनंदित करने वाले वाकये अक्सर सामने पाते है. जो की एक अच्छी बात है.

देहरादून के एक मुस्लिम परिवार ने मानवता का एक अच्छा उदहारण प्रस्तुत किया है. उन्होने सामाजिक भेदभाव की मान्यताओं से ऊपर उठकर एक हिन्दू बालक को पाल पोस कर बड़ा किया.  जिसकी हाल में उन्होने बड़े लाड़ प्यार से हिन्दू रीती रिवाजों से शादी भी की है. मुस्लिम परिवार ने गोद लिए हिन्दू बेटे के लिए हिन्दू रीती रिवाजों से अपनी बहु स्वीकार की.

खबर के अनुसार मुहम्मद शहनवाज़ जहीर जो की एक व्यवसायिक पायलट है, को दो बच्चो (आयुष और प्रार्थना) के गार्जियन के तौर पर जिम्मेदारी सँभालने की अनुमति न्यायालय ने दी थी. श्री शहनवाज़ ने न्यायालय को आश्वस्त किया था की वह बच्चो को उनके धर्म के अनुरूप ही पालेगा.  वह उनपर अपना धर्म थोपने का प्रयास नहीं करेगा.

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बात ये है की जब आयुष एवं प्रार्थना दयाल ने अपने माता पिता को खो दिया था. उनके पिता एक व्यावसायिक पायलट थे और माता एयर होस्टेस थी. एक ही साल में दोनों चल बसे थे. पिता को अपनी लाइलाज बीमारी का एहसास पहले से था.  इसलिये उन्होंने शहनवाज़ जहीर से प्रार्थना की थी की उनकी म्रत्यु के बाद वो बच्चो की जिम्मेदारी उठाए.

माता-पिता की म्रत्यु के ठीक बाद उनके रिश्तेदारों ने सम्पत्ति हड़पने की चाले चलना शुरू कर दिया.  इसी स्थिति को देखा तो बच्चो ने जानकारी शहनवाज़ जहीर को दी.  इस पर शहनवाज़ जहीर ने न्यायालय में बच्चो की देखभाल की जिम्मेदारी लेने के लिये दरखास्त लगाई. इस पर फैसला लेते हूए दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चो के गार्जियन के तौर पर जिम्मेदारी सँभालने का आदेश दे दिया.

साथ ही साथ कोर्ट ने मुहम्मद शहनवाज़ जहीर की इस माँग को भी स्वीकार किया की वो बच्चो के नाम से एक ट्रस्ट बनाएगा और उनके माता पिता की बाकि संपत्ति उसमे ट्रान्सफर कर देगा ताकि वो बाद में बच्चो के काम आ सके एवं जिस पर गार्जियन का भी अधिकार नहीं होगा.

हाल ही में शहनवाज़ जहीर ने गोद लिए हिन्दू बेटे के लिए हिन्दू रीती रिवाजों से शादी भी की और अपनी बहु का घर में गृह प्रवेश भी किया.

आपको बताना चाहेगे कि, जे जे एक्ट अमेंडमेंटस (२००६) के पहले तक मुस्लिम, पारसी, क्रिस्चियन, और ज्युइश समुदाय को गोद लेने का अधिकार नहीं था.  वे केवल गर्जियन्शिप ही ले सकते थे. जब की हिन्दू मेंटेनेंस एवं एडॉप्शन एक्ट (१९५६) के अनुसार हिन्दू, जैन, और सिख धर्म के लोगो को गोद लेने का अधिकार पहले से था.

शहनवाज़ जहीर ने  गोद लिए हिन्दू बेटे के लिए हिन्दू रीती रिवाजों से बहू तलाशी और उन्हें शादी के पवीत्र बंधन में बंधने का आशीर्वाद दिया.

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