हिमाचल प्रदेश में स्थित नैनादेवी (Nainadevi) मंदिर रहस्यो एवं चमत्कारों का एक दिव्य लोक है. नैनादेवी (Nainadevi) का यह मंदिर शिवलिक पर्वत श्रंखला के पर्वतो पर स्थित है. श्रावण मास की अष्टमी, चैत्र की नवरात्र और आश्विन नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में दूर दूर से श्रद्धालुगण यहाँ आते है. चंडीगड़ से यह मंदिर १०० किलोमीटर की दुरी पर है. यह राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित है एवं यहाँ के सब से नजदिकी हवाई अड्डो में से ऐक चंदीगड हवाई है.

यहाँ पर माता नैनादेवी (Nainadevi) की एक बहुत ही सुन्दर मूर्ति विराजमान है. जिसकी छटा देखते ही बनती है. मूर्ति के दाहिनी और माता काली एवं बाई और भगवान गणेश विराजमान है.  जय माता दी का उदघोष करते हूवे जब अठ्ठारह किलोमीटर पहाडी रास्ते से गुजरते है तो थकान जैसे कहाँ गायब हो जाती है पता ही नहीं चलता है. भक्ती का तो जैसे समा बन जाता है.

मंदिर की कहानी

एक पौराणिक कथा के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने सभी देवताओं को यज्ञ में आमंत्रित किया लेकिन भगवान् शंकर को आमंत्रीत नहीं किया एवं उन्हें अपमानित किया तो दुःख और क्रोध से भर कर पार्वती ने यज्ञ अग्नी में स्वयं को भस्म कर लिया जिससे भगवन शंकर क्रोध में आ जाते है और सती का शव कंधे पर लेकर तांडव नृत्य शुरू कर देते है. भगवन शंकर का ध्यान तांडव नृत्य से हटाने के लिए देवताओं के आग्रह पर भगवान् विष्णु पार्वती के शरीर को चक्र से ५१ टुकडो में विभाजीत कर देते है. और प्रथ्वी पर जहाँ जहाँ भी उनके शरीर के हिस्से गिरते है वहां पर शक्ती पीठ बन जाते है. कहते है की नैनादेवी (Nainadevi) में माता सती की आँखे गिरी थी.

मंदिर के देखे गए कुछ चमत्कार

नैनादेवी (Nainadevi) मन्दिर के अनेको चमत्कार और किस्से सुनाये जाते है. बताया जाता है एक बार धूमधाम से चल रही दुर्गा पूजा के बीच एक लडकी की आँखों की रोशनी लौट आयी थी. नेपाल की रहने वाली अंजू देवी ने माँ के अनेको किस्से सुन रखे थे. अपने भाग्य को आजमाने के लिए वे भी माँ के मंदिर में आयी थी. फिर वंहा जो चमत्कार हुआ उसने सारे लोगो को भावविभोर कर कर रख दिया. पूजा की धूम धाम के बीच लडकी की आँखों की ज्योति वापस आ गयी थे. ऐसे कई किस्सों का जिक्र वंहा के जनसामान्य किया करते है.

वंहा पर एक प्राचीन हवन कुंड भी है जो मात्र एक फूट गहरा है लेकिन टनो से लकड़ियां यहाँ खपा देने के बाद भी यहाँ राख का एक अंश भी नहीं मिलता, इतनी सारी राख कहाँ चली जाती है किसी को नहीं पता. इसे अनेको चमत्कार और किस्से यंहा के है जिनकी बयार सून कर देश विदेशो से हजारो श्रद्धालु यहाँ चले आते है.

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