Delhi High court में सुनवाई, नाम के आगे शाही लगाना संविधान के विरुद्ध
Delhi High court

Delhi High court  मे दिल्ली वक्फ़ बोर्ड के अधीन आने वाली दिल्ली की मस्जिदों के इमामों के आगे से शाही शब्द को हटाने के लिए एक जनहित याचिका लगाई गई है.

 

 

Delhi High court में सुनवाई, नाम के आगे शाही लगाना संविधान के विरुद्ध
jama masjid

याचिका मे कहा गया है कि मस्जिदों के इमाम वक़्फ़ बोर्ड के नियुक्त किये गए कर्मचारी हैं. लिहाजा समानता के अधिकार के दायरे मे आते हैं और कोई भी सरकार से संबंधित बोर्ड के लोग इस शाही शब्द का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.

 

हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी 2018 को होगी.

 

Delhi High court में सुनवाई, नाम के आगे शाही लगाना संविधान के विरुद्ध
ajay gautam

अजय गौतम

याचिका लगाने वाले अजय गौतम का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 18 में इमाम, नवाब, ज़मीदार, नंबरदार जैसे सभी टाइटल हटा दिए गए थे, लेकिन दिल्ली में जामा मस्जिद, फतेहपुरी समेत पूरे देश में मस्जिदों का नेतृत्व करने वाले लोग अपने नाम के आगे शाही इमाम लगा रहे है.

 

यह न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि संविधान के अनुछेद 14 समानता के अधिकार का उल्लंघन भी है.

याची ने दलील दी कि इमाम वक्फ बोर्ड के कर्मचारी होते हैं और बोर्ड सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था है.  ऐसे में किसी का अपने नाम के आगे इमाम लगाना गैरकानूनी है. कोर्ट ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे और तुरंत नाम के आगे से इमाम हटाने के आदेश दे.

याचिका में ये भी कहा गया है कि भारत सरकार के दिये गए टाइटल जैसे भारत रत्न, पद्म भूषण, पद्मश्री जैसे टाइटल ही देश में मान्य हैं. ऐसे में वक्फ बोर्ड किसी को कोई टाइटल नही दे सकता. सभी इमाम बोर्ड के लेटर हेड पर टाइटल का इस्तेमाल करते हैं, जिसका राजनीतिक और आर्थिक फ़ायदा लिया जाता है. लिहाज़ा इसे हटाया जाना ज़रूरी है.

  • देखते हैं आने वाले समय मैं Delhi High court क्या फैसला
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    लेता है?

  • अजय गौतम क्या करते हैं ?
  • आपकी राय क्या है ? नाम के आगे साही लगाना सही है या गलत.

 

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