नई दिल्ली: हाल ही में पाकिस्तान की आईएसआई को गोपनीय जानकारी उपलभ्ध कराने के आरोप में इंडियन एयरफोर्स के एक ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाहा (51) को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर प्रमोद कुशवाह ने इस बात की पुष्टि की है। ये बताया जा रहा है कि आईएसआई हनीट्रैप के जरिए अरुण मारवाहा से गोपनीय जानकारी हासिल कर रही थी। अरुण फेसबुक के माध्यम से दो महिलाओं के संपर्क में था। बाद में वह डॉक्युमेंट्स की फोटो खींचकर वॉट्सऐप के माध्यम से गोपनीय जानकारियाँ भेजने लगा।

51 वर्षीय अरुण मारवाहा कथित तौर पर आईएएफ मुख्यालयों में अभ्यासों से संबंधित वर्गीकृत दस्तावेजों के चित्रों को अपने स्मार्टफोन से क्लिक करके उन्हें व्हाट्सएप के जरिए भेज रहा था। अरुण मरवाहा को 31 जनवरी को पूछताछ के लिए भारतीय वायुसेना ने हिरासत में लिया था क्योंकि उसकी गतिविधियों संदेहास्पद पायी गयी थी।

– रिपोर्ट्स के मुताबिक अरुण मारवाहा ने स्वीकार किया है कि उसकी खुफिया डॉक्युमेंट्स तक पहुंच थी। वह एयरफोर्स हेडक्वार्टर में पोस्टिंग की ताक मे था

।- अरुण मारवाहा को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। उसका फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

– ग्रुप कैप्टन पर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के अनुसार केस दर्ज कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया जा रहा है कि अरुण मारवाहा कुछ दिनों पहले केरल गया था, जहां पर वह किरण रंधावा नाम की महिला के संपर्क में आया। था

– सेना अफसरों के अनुसार सेना हेडक्वार्टर में तैनात रहे अरुण मरवाहा से काउंटर इंटेलिजेंस विंग की तरफ से करीब 10 दिनों तक की गई पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया।

पुलिस अब पाकिस्तानी संचालकों को पहचानने की कोशिश में जुटी है. पुलिस का उद्देश्य साझा दस्तावेजों के बारे में अधिक जानकारी एकत्र करना है।

इस से पहले भी हनिद्रेप के कई मामले प्रकाश में आ चुके हे।

पूर्व में भी हैदराबाद पुलिस ने भारतीय सेना के एक निम्न रैंकिंग कर्मचारी को पाकिस्तान की जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. वह पाकिस्तानी जासूस को संवेदनशील जानकारी मुहैया करा रहा था। सुबेदार नायक पाटण कुमार पोद्दार सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर सेना बुकिंग सेंटर पर काम करता है, जो सेना के कर्मियों के लिए यात्रा व्यवस्था का काम करता था। बाद में खुफिया एजेंसियों से चेतावनी के बाद सेना के सहयोग से हैदराबाद पुलिस के सेन्ट्रल क्राइम स्ततिओंने गिरफ्तार किया था।

सेना के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव होने संबंधीत सख्त नियम हैं। जिसके तहत सैनिकों को अपनी पहचान, पद, तैनाती और अन्य जानकारियां साझा करने पर पाबंदी है। उन्हें वर्दी में अपनी तस्वीर लगाने तक की भी पाबंदी है।

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