परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया : क्या संबंध है पुराणों में

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परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया : क्या संबंध है पुराणों में
परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया : क्या संबंध है पुराणों में
परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया : क्या संबंध है पुराणों में
परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया : क्या संबंध है पुराणों में

आज भगवान परशुराम की जयंती है. आज के ही दिन अक्षय तृतीया भी मनाई जाती है. ऐसा माना जाता है की त्रेता युग के परशुराम एक मुनि थे. परशुराम को भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है. मान्यता है की भगवान हनुमान की तरह भगवान परशुराम चिरंजीवी है. अपने माता और पिता के आदेशक माने जाते है भगवान परशुराम. कहा जाता है की पाने पिताजी के आदेश का पालन करने के लिए अपनी माँ का सिर धड़ से अलग करने में उन्होने तनिक भी संकोच नही किया.

कैसे किया फिर से जीवित ?

वही फिर बाद में पिताजी से वरदान मांगकर उन्हें जीवित भी कर कर दिया भगवान परशुराम ने. ऐसा कहा जाता है की भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग से हुआ इसलिए वो तेजस्वी,ओजस्वी और वर्चस्वी महापुरुष बने. परशुराम ही थे जिनके एक इशारे से नदियों की दिशाएं बदल जाया करती थी. अपने महान बाल शल से आर्यों के शत्रुओं का नाश किया,हिमालय के उत्तरी भू भाग और इसके साथ ही साथ अरब में जाकर शत्रुओं का विनाश भी किया.

परशुराम ने क्षत्रियों का 21 बार किया विनाश जो की नही है पूर्ण सत्य :-

भगवान परशुराम के लिए ये बाद कही जाती है की उन्होने रहते 21 बार क्षत्रियों को धरती से विलुप्त कर दिया था. लेकिन इसमे पूरा सत्य नही है पौराणिक कथा की माने तो पूर्ण क्षत्रिय का विनाश नही बल्कि क्षत्रिय के कुल वंश जिसका नाम था हैहय वंश. हैहय वंश के सम्पूर्ण विनाशक रहे है भगवान परशुराम. साथ ही साथ ये भी कहा जा सकता है उनके रहते हुए रजा दशरथ जैसे पराक्रमी रजा भी थे परशुराम ने रजा दशरथ का कुछ नही बिगाड़ा. प्रमाणों में ये भी कथन मिलता है की उन्होंने न्याय पर चलने वाले क्षत्रियों का कुछ नही किया और अन्याय के मार्ग परे चलने वाले क्षत्रियों को सबक सिखाया.

कहा हुआ था जन्म ?

ऐसा माना जाता है कि भगवान parshuram का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के जलालाबाद में हुआ था. उनकी प्रारंभिक जन्म भूमि और तपोभूमि जौनपुर के  तट पर जमौथा गाँव में हुई थी.

केरल प्रदेश को बसाने का श्रेय जाता है परशुराम को :-

केरल को बसाने वाले और कोई नही भगवान parshuram ही थे. शोध की माने तो परशुराम में ब्रह्मा की सृजन शक्ति,विष्णु की पालन शक्ति और शिव की संहार शक्ति विधमान थी,इसलिए वे त्रिवंत कहलाए. उनकी अगर तपस्या स्थली की बात करें तो तेरुवंपुरम में आज भी स्तिथ है. तेरुवंपुरम केरल की राजधानी है.

शिव और राम का संगम पर कैसे ?

परशु को ‘पराक्रम’ का प्रतिक माना गया है और राम को सत्य का प्रतिक माना गया है. इसी प्रकार के थे parshuram दोनों के दोनों गुण मौजूद थे उनमे. साथ ही सत्य की स्थापना करने के लिए उन्होने पराक्रम का सहयोग लिया और अन्याय के रास्ते पर चलने वाले क्षत्रियों का विनाश किया. परशुराम को भगवान विष्णु का 6वा अवतार भी माना जाता है. दूसरी चीज ये भी है परशुराम को भगवान शिव का प्रतिक माना गया है और राम को विष्णु का प्रतिक माना गया है.

नदियों की दिशाओं को बदलने का श्रेय जाता है भगवान परशुराम को :-

एक शोध की माने तो दावा ये है की ब्रह्मपुत्र,रामगंगा,बाणगंगा को लोगों के कल्याण के लिए अन्य दिशाओं में प्रवाहित करने का भी श्रेय भगवान परशुराम को ही जाता है. लेकिन जब भी शासक अपनी मनमानी से राज्ञ या देश का शासन करते भगवान परशुराम जैसे ब्राह्मण कुल में जन्मे और अन्याय करने वालों का विनाश कर समाज को सुख तथा शांति प्रदान की.

पुराणों में क्या कहा गया है ?

parshuram के बारे में पुराणों में लिखा है की महादेव की कृपा और योग के उच्चतम श्रृंखला में बैठे आज भी किसी महेंद्र पर्वत पर किसी गुप्त स्थान पर रहते है. वही कई हिमालय यात्रियों ने भगवान परशुराम के मिलने की भी बात स्वीकार की है. अनीति,आचार,दुष्कर्मी को कड़ी से कड़ी सजा देने में बिलकुल ना चुकने वाले parshuram की पुजा युगों-युगों तक होती रहेंगी.

  • प्रमुख बिंदु :-

    परशुराम नही थे क्षत्रिय विरोधी जाने कैसे?.

  • जाने परशुराम ने कैसे किए समाज कल्याण?.

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