पत्नी मजबूर नही है पति के साथ रहने के लिए लिए - सुप्रीम कोर्ट
पत्नी मजबूर नही है पति के साथ रहने के लिए लिए – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पत्नी के पक्ष में एक आदेश जारी किया है जिसे सुनकर विवाहित पत्नी खुशी से फुले नही समाएगी. इस फैसले से ये बात भी सामने आई है की पत्नी मजबूर नहीं है की वो पति के साथ ही रहें. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बात कही की पत्नी कोई वस्तु नहीं या कोई समान नहीं है. फिर वो चाहे पति की इक्षा हो की पत्नी रहे ही क्यूँ ना हो. कोर्ट ने पति पत्नी के एक मामले के दौरान ये बात कही. सावधान हो जाओ क्रूर पतियों पत्नी मजबूर नही है.

रिपोर्ट की माने तो इस केस में पत्नी ने पति के खिलाफ केस दर्ज करवाया है. पत्नी ने पति के खिलाफ क्रिमनल केस दर्ज करवाया है. पत्नी ने ये भी कहना है वो पति के साथ अब नही रहना चाहती जबकि पति ने साथ रहने की इक्षा जताई है. पत्नी मजबूर नही है क्यों हो मजबूर उनकी भी अपनी जिंदगी है अपनी इक्षाएं है.

हाई कोर्ट के अधिवक्ता ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट के अधिवक्ता संजय महरा ने कहा की शादी के बाद भी एक दुसरे के साथ तभी रह सकते है जब इसमे दोनों की सहमति हो. ऐसा भी देखा गया है की शादी के तुरंत बाद पति पत्नी अलग-अलग रहने लगते है क्युकी ये सही भी है पत्नी मजबूर नही है और अगर मजबूर नही भी है तो उन्हें मजबूर नही किया जा सकता है. कोर्ट ने कई मामले में पति पत्नी को साथ रहने के लिए कुछ समय भी दिए हुए है.

शादी होने के बाद जाने महिला को मिलते है ये 5 अधिकार :-

  1. स्त्री धन का अधिकार :- शादी के पहले या बाद में जो पैसे या गिफ्ट मिलते है वो स्त्रीधन होता है. कहने का मतलब ये की इसपर बस स्त्री का ही अधिकार होता है. आपको समझ आया की पत्नी मजबूर नही है.
  2. रहने का अधिकार :- महिला को अपने पति के साथ रहने का अधिकार है. फी चाहे घर पूर्वजो का हो या जॉइंट फैमिली का ही क्यूँ ना हो.
  3. कमिटेड रिलेशनशिप का अधिकार :- बिना तलाक के कोई भी हिन्दू पति पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला से रिलेशन नही बना सकता है. ऐसा पति अगर अगर करता है तो ये कानून जुल्म है. महिला को कमिटेड रिलेशन का अधिकार है. इससे पता चलता है की पत्नी मजबूर नही है.
  4. स्वाभिमान के साथ रहने का अधिकार :- महिला या पत्नी को पुरे स्वाभिमान के साथ रहने का पूर्ण अधिकार है. कोई मेंटल या फिजिकल टॉर्चर नही कर सकता है. अब आप समझ गये होंगे की पत्नी मजबूर नही है.
  5. फाइनेंसियल सपोर्ट का अधिकार :- यदि पत्नी capable नही है निःसंकोच पति उनकी मदद करेंगे. जरुरी सुविधओं के साथ जीना हर महिला परम कर्तव्य है.

प्रमुख बिंदु :-

  • सुप्रीम कोर्ट का पति के खिलाफ ये आदेश.
  • पत्नी का साथ देकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये बयान.

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