PF और बेसिक सैलरी अब Companies आपकी बेसिक सैलरी को अलाउंस में बांटकर आपकी बेसिक सैलरी को कम करने या दिखाने  की चालाकी नहीं कर सकेंगे। इससे PF अकाउंट में अधिक पैसा आएगा। बेसिक सैलरी पर कंपनियों की चालाकी पर अंकुश लगाने के लिए कर्मचारी भविष्‍य निधि ने वेज(मजदूरी) की परिभाषा तय करने का फैसला किया है। अब तो बढ़ जाएगा PF का पैसा।

इसके तहत अगर बेसिक सैलरी का 50 फीसदी से अधिक अलाउंस रखा जाता है तो इसे भी बेसिक सैलरी का हिस्‍सा माना जाएगा और कंपनी को भी इस पर भी पीएफ काटना होगा।  क्या सच में लोगो को पीएफ  अब पूरा मिलेगा या ये कहे की पूरी सैलरी मिलेगी। PF को लेकर ये नयी खुशखबरी है।

CBCT की अप्रैल में होने वाले बैठक में प्रस्ताव पर होगी बात  :-

EPFO ने वेज की प्रस्‍तावित परिभाषा पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई है। क्या पीएफ  को मिलेगी मंजूरी?. भारतीय मजदूर संघ के महासचिव और सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी सीबीटी के मेंबर विरजेश उपाध्‍यय ने  बताया कि अप्रैल में होने वाली सीबीटी की बैठक में वेज की प्रस्‍तावित परिभाषा का प्रस्‍ताव रखा जाएगा। सीबीटी की मंजूरी के बाद ईपीएफ एक्‍ट में संशोधन होगा। PF का पूरा पैसे अब हुआ लोगों का।

क्यूँ पड़ी वेज(मजदूरी) की परिभाषा तय करने की जरुरत?

मौजूदा समय में EPF एक्ट में वेज की परिभाषा तय नहीं है। इसकी वजह से Employer और इसके अनुरूप authority वेज(मजदूरी) की व्‍याख्‍या अलग अलग तरह से करते हैं। PF के एक्ट के तहत होना चाहिए। इसके अलावा EPFO के अधिकारी भी वेज के मुद्दे पर अलग अलग स्‍टैंड लेते हैं। EPFO को ऐसी शिकायतें मिल रहीं हैं कि एम्‍पलॉयर बेसिक सैलरी प्‍लस डियरनेस अलाउंस 10 से 30 फीसदी तक दिखाते हैं बाकी सैलरी तमाम अलाउंस जैसे परफार्मेंस अलाउंस, एंटरटेनमेंट अलाउंस, कन्‍वेंस अलाउंस और पर्सनल अलाउंस में बांट देते हैं। PF का निर्धारण होना चाहिए।

Employee का कैसे कम कटता है PF?

Employee का बेसिक वेज और अलाउंस कम रहने से उसकी इन हैंड सैलरी तो बढ़ जाती है लेकिन उसका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन कम हो जाता है। इससे उसके PF अकाउंट में कम पैसा जाता है। इस तरह से रिटायरमेंट के समय उसके PF फंड में उतना पैसा नहीं होगा जितना उसको रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए चाहिए।

पूरा क्यूँ नहीं हो रहा सोशल सिक्यूरिटी ?

EPFO के एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि कंपनियां वेज की तय परिभाषा तय न होने का फायदा उठा कर सैलरी को तमाम अलाउंस में बांट देती हैं। इम्‍पलाई की बेसिक सैलरी कम रखी जाती है। इससे PF कम कटता है। ऐसे में EPF एक्‍ट के तहत Employee को सोशल सिक्‍योरिटी कवर मुहैया कराने का मकसद पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह से Employee की पेंशन भी कम बनती है।

प्रमुख बिंदु :-

  • PF बढ़ेगा बेसिक सैलरी बढ़ेगी.
  • क्यूँ नहीं पूरा हो रहा सोशल सिक्यूरिटी.

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