इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन के मोस्को पहुँचने के दो हफ्ते बाद वाशिंगटन द्वारा जेरुसुलम को इसराइल की राजधानी के तौर पर मान्याता देने सम्बन्धी विषय पर फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बासी पुतिन से मिलने सोमवार को रूस पहुंचे. फिलिस्तीन ने उपरोक्त विषय पर रूस से सहयोग माँगा.

पूरी कहानी विस्तार से

इसराइल पूरे जेरुसुलम को अपनी राजधानी मानता है, दूसरी तरफ फिलिस्तीन शहर के पशिमी क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जो की इजराइल ने १९६७ के मिडिलईस्ट युद्ध के बाद अपने कब्जे में ले लिया था और स्वतंत्र घोषित कर दिया था. विवाद का मुख्य विषय पुराना शहर है.  यह वह जगह है जहां मुसलमानों एवं यहूदीयों के प्रमुख धार्मिक शहर स्थित है.

प्रमुखत: वह पहाड़ी शिखर का क्षेत्र जो की इसाई एवं यहूदियों दोनों के लिए सामान रूप से पवित्र मना जाता है. बाइबल में वर्णित प्रसिद्ध मंदिर यहाँ पर हजारो वर्षो से स्थित है जो की यहूदियों की पवित्रतम जगह है.  यहूदी इस मंदिर को टेम्पल माउंट कहते है.  यही पर अल अस्क मस्जीद भी है, जो मुसलमानों की महत्वपुर्ण पवित्र जगह है. यहाँ पर स्वर्ण मंडीत डोम भी मोजूद है. हलाकि यह जगह इसराइली सरकार के कब्जे में है.

लेकिन पश्चिमी जेरुसुलम में इसके विलय को अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी मान्यता नहीं देती. अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय बातचीत  द्वारा मामले का हल निकलने का सुझाव देता है. जहाँ तक राष्ट्रपति ट्रम्प का सवाल है, उन्हौंने अमिरीकी दूतावास को स्थान्तरित करने का वादा तो कर लिया, परन्तु यह उनके लिए एक सरल फैसला साबित नहीं हुआ है.

ऐसा अमिरिका में कानून है की हर छ: माह मे अमिरीकी राष्ट्रपति को यह सुनिश्चित करने के लिए वेवर साइन करना होता है की अमिरीकी दूतावास अभी तेल अविव में ही स्थित है. अमिरीकी राष्ट्रपति ने पहले इसे साइन कर दिया था. अब छ: माह का समय गुजर जाने के बाद भी अभी नवीनीकरण बाकी है.  फिलिस्तीन ने संबंधीत विषय पर रूस से सहयोग माँगा है.

आगे की बात

फिलिस्तीनी सरकार ने इस बीच चेतावनी दी है कि जेरुसुलुम की स्थिति में किसी भी तरह के परिवर्तन से शांति स्थापना के सभी प्रयास बंद हो जायेंगे.  उन्होने व्यापक प्रदर्शनों की भी संभावना जताई जो की बड़ी अशांति में परिवर्तित हो सकती है.

दिसंबर ६ के बाद से, जब से जेरुसुलुम को इस्राईल की राजधानी के रूप में अमिरिका द्वारा मान्यता दी गयी है, तब से ही अमेरिकी सरकार और फिलिस्तीनी सरकार के बीच सम्बन्ध सामान्य नहीं है. फिलीस्तीनी सरकार की मान्यता है, कि अमेरिका अपना रोल ईमानदारी से नहीं निभा पा रहा है.

फिलिस्तीन सरकार ने इस्राइल-फिलिस्तीन विवाद में अमेरिका की किसी भी तरह की मध्यस्ता पर एतराज जताया है.  उसने पूर्ण फिलिस्तीन राज्य की स्थापना के लिये सयुंक्त राष्ट्र की मान्यता प्राप्ति के लिये कार्य करने का इरादा जताया है.

उपरोक्त विषय पर फिलिस्तीन ने रूस से सहयोग माँगा है, जबकि कुछ दिन पहले ही इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन्याहू भी राष्ट्रपति पुतिन से मिल कर गए हैं.

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