राहुल गाँधी बने मिसाल : भारत सरकार आज कर रही उपवास
राहुल गाँधी बने मिसाल : भारत सरकार आज कर रही उपवास

वैसे अगर देखा जाए तो राहुल गाँधी का परचम लहराता जा रहा है. भले ही वो कांग्रेस को जीत दिलाने में सक्षम ना रहे हो लेकिन अगर इसके अलावा बात की जाए तो विपक्षी पार्टी को अपने नक़्शे कदम पर चलाने में मजबूर हुए है इस बात से किसी भी तरह से नाकारा नही जा सकता है. अब आप सोच रहे होंगे राहुल गाँधी कैसे बने मिसाल?. आइए जानते है.

राहुल गाँधी बने मिसाल को ऐसा समझा जा सकता है की पिछले दिनों राहुल गाँधी उपवास पर थे और अब भारत सरकार और उनके मंत्री उपवास पर है. तो हुए ना राहुल गाँधी मिसाल. भारत सरकार की बात करते है तो सबसे पहला नाम आता है माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी का जिनका भी आज उपवास है. वे उपवास के दौरान डिफेन्स इक्स्पों का उद्घाटन करेंगे. बा आते है भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह का,वो कर्नाटक हुबली में उपवास करेंगे. कहा ऐसा भी जा रहा है हालिया संसद में कम काज ना होने की वजह से इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 600 जिला मुख्यालय में उपवास कर रही है.

वही बात करें भाजपा के आला अधिकारी और मंत्री जैसे सुषमा स्वराज,राजनाथ सिंह,पियूष गोयल,धर्मेन्द्र प्रधान दिल्ली के हनूमान मंदिर में उपवास रखेंगे. सवाल ये नही है की भारत सरकार उपवास कर रही है जबकि सवाल ये है की क्या सत्ता में रहते हुए भी इतने राज्यों में शासन रहने के बावजूद भी क्या भाजपा हार मनन गयी है विपक्ष का विरोध क्या इतना भरी है?.

राहुल गाँधी को राजनीती का जानी लीवर कहा जाता है. भले ही वो कुछ भी ना बोल रहे हो उनके ट्विट भी इतने अनोखे और हास्यापद होते है की एक समझदार इंसान तोमाठे पर सेर रखकर बोले ओहो ये राहुल गाँधी से उम्मीद नही था. जहाँ अगर बात करें संसद में उन्हें बोलने की और उनके चल चलन की तो हर एक छोटी खबर जिसमे कोई ना कोई तुक होगा और ना ही कोई विषय फिर भी अपनी विशिष्ट उल्लेख के लिए बोलने के लिए तंज कसने से लेकर उनके रूस जाने तक. सभी यही कहते है संसद बस तीन चीजों से चलती है राहुल गाँधी का एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट और केवल एंटरटेनमेंट.

क्या विपक्ष यानि की कांग्रेस जितने भी विरोद कर रही है संसद में क्या वो सच है?. ये भाजपा के अलावा और मंत्रियों के अलावा किसी को नही पता. क्या इतना मजबूर हो गयी है भाजपा की उन्हें उपवास का सहारा लेकर संसद को सुचारू रूप से चलाने का सहारा लेना पड़ रहा है. अगर ऐसा है तो किसी और की हार नही बल्कि भाजपा की हार है. इस हार का परिणाम आपको आने वाले लोक सभा चुनाव में देखने को मिल जाएगा. राहुल गाँधी के नक्शे कदम पर जब भाजपा को चलाना पड़ रहा है,नरेन्द्र मोदी को चलना पड़ रहा है इससे बुरा और इसे बड़ी हार भाजपा के लिए कुछ हो ही नही सकती है.

नरेन्द्र मोदी कभी कांग्रेस पार्टी को अहंकार और सत्ता की भूख के लालची कहा. क्या नरेन्द्र मोदी जब रातोरात जदयू के साथ मिलकर सरकार बना सकते है ,क्या वो सत्ता के भूखी नही है. कही 2 सीट पाकर भी भाजपा अपनी सरकार बना लेती है क्या वो लालची नही है.

क्या करती  है भाजपा ?

अभी हाल फिलहाल में कितने सारे हिंसा हुए बिहार को ले लीजिए,वेस्ट बंगाल को ले लीजिए कितनी सारी हिंसाएँ हुई. क्या इसकी जिम्मेदारी सरकार को नही है. सरकार इसे गलत क्यूँ नही मानती. ये भाजपा का इतिहास रहा है अगर जिस क्षेत्र में भाजपा की सरकार ना हो और अगर उसे सत्ता में आना है तो पहले उस प्रदेश में हिंसा कराती है, विद्रोह कराती है फिर अपनी जगह बनाने में कायम होती है.

यही प्लाट खेला है भाजपा ने वेस्ट बंगाल में और बिहार में भी. यु तो सीबीआई की छापेमारी आजकल आम बात हो गयी आपने एक चीज जरुर नोटिस की होगी अगर किसी विपक्ष के नेता ने भाजपा के बारे कुछ बोल दिया तो सीबीआई के पास ऐसा लगता है वायरलेस सिग्नल होता है जो भारत सरकार के पास मैसेज चला जाता है और और सीबीआई को अपने तौर तरीके सरकार बताकर विपक्ष के नेता जिन्होने कुछ बोला होता है उनके यहाँ अगले दिन सीबीआई की छापेमारी हो जाती है.

अब अगर बात करें पत्रकार की तो आजकल आए दिन पत्रकारों को धमकियाँ मिल रही है. कितने पत्रकार को तो अपनी जान गवानी पड़ गई. आखिर इनके पेट पर लात तो मार ही रही है और इनके घर परिवार को भी ये सोचने पर पर मजबूर कर दिया है की क्या मीडिया के लोग सुरक्षित भी है या नही.

नरेन्द्र मोदी जी आप तो धोखेबाज निकले ?

इनका ख्याल ना रखकर सरकार इनके इनके घरों को उजाड़ने में उतारू है. क्या मीडिया को भी सरकार अपने नक़्शे कदम पर चलाना चाहती है. ऐसा कभी नही होगा. मीडिया को अपने काम स्वछता से ठीक ढंग से सरकार करने दे और साकार अपने कामकाजो  को सुचारू रूप से चलाए इसमे सबकी बेहतरी होगी. भारत को अपराध मुक्त सरकार कब करेगी. नरेन्द्र मोदी चुनाव में किये गए वादे कहा गये आपके वो गाना है ना मिलने की की तुम कोशिश करना वादा कभी ना करना वादा तो टूट जाता है. बस नरेन्द्र मोदी जी आप तो धोखेबाज निकले. आपके सारे कसमे वादे सारे के सारे झूठे निकले.

किसानों का आन्दोलन हो या आरक्षण के लिए आन्दोलन हो सभी में सरकार कुछ नही कर पाई हिंसा होते रहे और गाँधी जी तीन बंदरो की तरह ना आखों से देखा ना ही कानों से सुना और ना ही कुछ बोला. क्या सरकार के लोग्गो को ये नही की तमाशे और हिंसा में क्या अंतर होता है. अगर अंतर नही पता तो उन्हें सरकार में रहने का कोई हक़ नही है. ऐसे निर्मम लोग कैसे हो सकते है. क्या इन्हें आप सत्ता का लालच नही कहेंगे तो और क्या कहेंगे. अंतिम शब्दों में यही कहूँगा सरकार ये उपवास ना करके जमीनी स्तर पर सुधर करें देश सुधारे सब लोग सुधर जाएंगे चाहे वो विपक्षही क्यों ना हो.

प्रमुख बिंदु :-

  • जाने राहुल गाँधी कैसे बने मिसाल?.
  • जीवन में पहला काम  राहुल ने किया अच्छा जाने क्या?.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here