अयोध्या में आस्था हिलोरें ले रही हैं तो सीतामढ़ी और आंजन धाम में श्रद्धा का यह भाव व्यवस्थाओं से संघर्ष करता नजर आता है।

रामनवमी यानी भगवान श्रीराम का जन्म दिन। दैनिक भास्कर ने इस मौके पर रामजन्म भूमि अयोध्या, सीता जन्म स्थली सीतामढ़ी और हनुमान के जन्म स्थल गुमला के अांजन धाम से लाइव कवरेज किया। यह कवरेज इन मंदिरों के ताजा हालात जानने के लिए किया गया। हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि सभी स्थलों पर श्रद्धा का भाव है, लेकिन कहीं ज्यादा कहीं कम। अयोध्या में आस्था हिलोरें ले रही हैं तो सीतामढ़ी और आंजन धाम आते-आते श्रद्धा का यह भाव व्यवस्थाओं से संघर्ष करता नजर आता है। अयोध्या से अतुल उपाध्याय, पुनौरा से शशिभूषण, गुमला से अश्विनी दास की रिपोर्ट।

– ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥ नक्षत्रे दितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पंचसु। ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह॥ प्रोद्यमाने जनन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम्। कौसल्याजयद् रामं दिव्यलक्षसंयुतम्॥ -वाल्मीकि रामायण बालकांड, 18वें सर्ग का 8-9-10 श्लोक

अर्थात-चैत्र मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथी को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में कौशल्यादेवी ने दिव्य लक्षणों से युक्त सर्वलोकवन्दित श्री राम को जन्म दिया।

बस एक ही चर्चा-मंदिर बनना ही चाहिए

– रेलवे स्टेशन के 1 नंबर प्लेटफार्म पर उतरते ही सामने स्टेशन अधीक्षक और रेल थाना के प्रभारी के दफ्तर पर नजर पड़ती है। दरवाजे पर लिखा है-‘प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कोसलपुर राजा।’ यह अयोध्या है। हर जगह बस एक ही चर्चा-मंदिर बनना ही चाहिए। प्रसाद की दुकान पर खड़े लोग दुकानदार से भी यही सवाल करते हैं-क्या लगता है इस बार मंदिर बन जाएगा? जवाब मिलता है-उम्मीद तो जगी है, देखिए! दुकानदार दिनेश कहते हैं- मंदिर बन जाए तो हमारा भाग्य खुल जाए। हमारा सबकुछ राम के ही भरोसे है। फिर हनुमान गढ़ी तरफ इशारा करते हैं – नहीं बना तो हनुमान जी तो हैं ही।

पार्षद से लेकर प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया तक भाजपा

– त्रिपदा प्रसाद के मालिक कहते हैं कि वार्ड पार्षद से लेकर प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया तक भाजपा के ही हैं। अब तो राम मंदिर बनना ही चाहिए। मंदिर परिसर करीब 6.7 एकड़ में है, वैसे रामजन्म भूमि के लिए अधिग्रहित परिसर करीब 70 एकड़ का है। बैरिकेंडिंग 2 किमी लंबी है।

रामनवमी पर लाखों की संख्या में आते हैं भक्त

– दाहिनी ओर टेंट में राम लला विराजमान हैं। दर्शन के लिए पांच सेकेंड का वक्त मिलता है। रोजाना 15 हजार भक्त दर्शन करते हैं। रामनवमी के दिन संख्या 25 लाख आंकी जा रही है।

मंदिर का मॉडल तैयार

– मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला भी आकर्षण का केंद्र है। 4 एकड़ में मंदिर निर्माण होना है। निर्माण में 1 लाख 75 हजार घनफुट पत्थर का उपयोग होगा। 1 लाख 25 हजार घनफुट पत्थर को आकार दे दिया गया है। शेष पत्थर आने हैं। मंदिर का मॉडल भी तैयार है। जिसे भक्तों के लिए विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय में रखा गया है। मंदिर दो मंजिल का होगा। इसमें 212 पाए होंगे। बगल में ही शिला पूजन के दौरान की पांच लाख ईंटें हैं। हर ईंट पर श्री राम का नाम।

6 किलोमीटर में फैले 7 हजार मंदिर

– अयोध्या में राम दरबार के करीब 7 हजार मंदिर हैं। राम दरबार का अर्थ जहां राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान एक साथ विराजमान हैं। रामनवमी के दिन सभी मंदिरों में रामजन्मोत्सव की तैयारी है। शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख है। हर घर में राम-जानकी के मंदिर हैं।

– लोग कहते हैं-हमारा सबकुछ रामजी के ही भरोसे है। मंदिर बन जाए तो भक्त की संख्या बढ़ेगी स्थानीय लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा।

अयोध्या के कनक भवन में मुख्य रामजन्मोत्सव

– हनुमान गढ़ी के बगल में ही रामकोट मोहल्ला है। यहां कनक भवन है। मान्यता है कि यह भवन माहारानी कैकेयी का था। संपूर्ण महल सोने से निर्मित था। कैकैयी ने इस महल को जानकी जी को मुंह दिखाई में उपहार के तौर पर दिया था। रसिक संप्रदाय के संतों में इस महल के प्रति अपार श्रद्धा है। कनक भवन में ही रामजन्मोत्सव का मुख्य समारोह है। महल का जीर्णोद्धार राजा विक्रमादित्य ने किया था। बाद में टीकमगढ़ की महारानी वृषभान कुंवर ने इसे एक विशाल और सुंदर भवन के रूप में बनवाया। जो अभी मौजूद है। इस महल में दो शिलालेख हैं। एक संस्कृत में है, जिसमें इस बात का जिक्र है कि द्वापर के आरंभ में महाराजा कुश ने इसका विशेष रूप से सौंदर्यीकरण कराया था। मध्य द्वापर में महाराज ऋषभ ने इसका पुन: जीर्णोद्धार कराया था।

राम जन्मभूमि

– अयोध्या में सभी को उम्मीद है अदालत से फैसला आने पर यहां भव्य राम मंदिर बनेगा। यह आम मान्यता है कि सर्वमान्य फैसला होगा और इसी से निकलेगा मंदिर का रास्ता।

सुरक्षा

रामजन्म भूमि मंदिर की सुरक्षा के लिए 2000 यूपी पुलिस के जवान, सीआरपीएफ व पीएसी के जवान तैनात रहते हैं। कुल मिलाकर करीब 3000 जवान। राम जन्मभूमि और आसपास के इलाकों को जोन में बांटा गया है। जन्मभूमि और उसके आसपास का इलाका रेड जोन में है। बाहरी इलाका येलो जोन में।

निर्माण की तैयारी का 65 फीसदी काम पूरा

– विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार मंदिर निर्माण का 65 से 67 प्रतिशत काम हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।

– 1989 में राम शिला पूजन के लिए देश के प्रत्येक गांव से ईंट मंगाई गई थी। साथ ही लोगों से सवा रुपए दान स्वरूप देने का आग्रह किया गया था। उससे करीब साढ़े-तीन-पौने चार करोड़ रुपए आए थे। यह रकम पत्थरों के मंगाने में लगाई जा चुकी है।

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