2017 में भाजपा की संपत्ति पे ADR द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ने केन्द्रीय सरकार पर कई सवाल उठाये थे. ऐसी ही एक रिपोर्ट ADR ने क्षेत्रीय पार्टीज की संपत्तियों पर जारी की है. यह रिपोर्ट इन २२ पार्टीज द्वारा चुनाव आयोग एवं वित्त विभाग को दी गयी ऑडिट रिपोर्ट से ली गई है. रिपोर्ट विभिन्न पार्टीज की संपत्ति में 2011-12 से 2015-16 में हुयी बढ़ोतरी दर्शाती है.

इस रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 में इन 22 क्षेत्रीय पार्टीज की औसत संपत्ति 24.11 करोड़ थी जो की 2015-16 में बढ़कर 65.77 करोड़ हो गई.

समाजवादी पार्टी

दिल्ली में स्थापित इस थिंक टैंक के अनुसार अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी इस रिपोर्ट में 634.96 करोड़ रूपए के साथ सबसे ऊपर है. 2011 में सपा ने अपनी संपत्ति 212.86 दर्ज करवाई थी जो 2015-16 में 198% बढ़ गई.

 

AAP पार्टी

दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी, आप ने अपना नाम 2012 में 1.165 करोड़ की कुल संपत्ति क साथ दर्ज कराया था. जो की 2015-16 में 3.765 तक पहुँच गई.

 

AIADMK कुल संपत्ति में बढ़ोतरी

तमिलनाडु की विवादास्पद रूलिंग पार्टी AIADMK, अपनी संपत्ति 155% की बढ़ोतरी के साथ और विवादों में आ गई है. रिपोर्ट के अनुसार 2011 मे इसकी कुल संपत्ति 88.21 करोड़ रूपए थी जो 2015-16 में बढ़कर 224.87 करोड़ हो गई.

 

तेलुगु देशम पार्टी

तेलुगु देशम पार्टी की संपत्ति 2011 में 11.538 करोड़ से 229% बढ़कर  46.09 करोड़ तक पहुँच गई.

 

YSR कांग्रेस

आंध्र प्रदेश की YSR कांग्रेस ने भी इस लिस्ट में जगह बनाते हुए अपनी संपत्ति 2015-16 में 3.765 दर्ज करवाई जो की 2011 में सिर्फ 1.165 ही थी.

 

इस रिपोर्ट ने हमेशा की तरह राजनीतिक पार्टीज की एक अलग छवि जनता के सामने प्रस्तुत की है. जहाँ नेताओं की सम्पति लगातार बढती जा रही है पर गरीबों की संख्या में कोई अंतर नहीं. क्या ये सच जानकार केंद्र सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर अच्छे दिन अभी भी अमीरों के घरों में ही रहेंगे?

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