मोर्य मतलब मगध, महाभारत युद्ध (3139 ईसा पूर्व) के बाद चौथा राजवंश था. Chandragupta Maurya, मौर्य साम्राज्य के पहले राजा और संस्थापक थे. मौर्य साम्राज्य भारत के इतिहास में पहला बड़ा Indian Empire था, जो मौर्य वंश द्वारा 321 ईसा पूर्व से 185 ईसा पूर्व तक शासन में था.

मौर्य साम्राज्य इतिहास

 सबसे बड़ा Indian Empire किसने बनाया?
मौर्य साम्राज्य इतिहास

उस समय, मगध साम्राज्य में नंद वंश का शासन था और मगध एक शक्तिशाली साम्राज्य था. जब सिकंदर पंजाब की और से चढ़ाई कर रहा था. तब Chanakya जो Kautilya के नाम से भी जाने जाते थे. उन्होनें इस बारे में मगध साम्राज्य के सम्राट घनानन्द बताने की कोशिश की ताकी मगध साम्राज्य खत्म होने से बच सके.

लेकिन सम्राट घनानन्द ने उनकी बात को ठुकरा दिया. और Chanakya का अपमान किया तभी Chanakya ने प्रतिज्ञा ली की घनानन्द को सबक सिखाना हैं और मगध साम्राज्य को एक अच्छा राजा दिलाना हैं.

भारत छोटे -छोटे गणों में विभक्त था. उस वक्त कुछ ही प्रमुख शासक जातिया थी जिसमे शाक्य, मौर्य का प्रभाव ज्यादा था. चन्द्रगुप्त उसी गण प्रमुख का पुत्र था और बाल अवस्था से उसमें योद्धा के सारे गुण मौजूद थे. चन्द्रगुप्त में राजा बनने के स्वाभाविक गुण भी थे ‘इसी योग्यता को देखते हुए Chanakya ने उसे अपना शिष्य बना लिया.

Chanakya अच्छी तरह से राजनीति और राज्य के मामलों में निपुण थे. उन्होंने चंद्रगुप्त को और सेना को तैयार किया और उन्हें नंद वंश को समाप्त करने में मदद की.

इस प्रकार, Chanakya की मदद से, चंद्रगुप्त ने आखिरी नंद शासक को उखाड़ दिया और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की जहां Chandragupta Maurya राजा बन गये और Chanakya न्यायालय में मुख्यमंत्री बने.

इस वंश के महत्वपूर्ण शासकों में चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसारा और राजा अशोक थे. यह साम्राज्य राजा अशोक के तहत अपने चरम पर पहुंच गया हालांकि, सम्राट अशोक की मौत के तुरंत बाद, यह शक्तिशाली साम्राज्य तेजी से गिरने लगा.

आइये हम मोर्य साम्राज्य को विस्तार से जानते हैं.

चंद्रगुप्त मौर्य (Chandrgupta Maurya)

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चंद्रगुप्त मौर्य

Chandrgupta Maurya(323-298 ईसा पूर्व) प्राचीन भारत में मौर्य साम्राज्य के पहले संस्थापक थे. वे पुरे भारत को एक साम्राज्य के अधीन लाने में सफल रहे. Chandragupta Maurya के राज्या रोहण की तिथि 324 ईसा पूर्व की मानी जाती है, उन्होंने लगभग 25 सालो तक शासन किया और इस प्रकार उनके शासन का अंत प्रायः 297 ईसा पूर्व में हुआ.

बाद में 297 में उनके पुत्र बिन्दुसार ने उनके साम्राज्य को संभाला. मौर्य साम्राज्य को इतिहास के सबसे सशक्त सम्राज्यो में से एक माना जाता है. अपने साम्राज्य के अंत में चन्द्रगुप्त को तमिलनाडु और वर्तमान ओडिसा को छोड़कर सभी भारतीय उपमहाद्वीपो पर शासन करने में सफलता भी मिली.

उनका साम्राज्य पूर्व में बंगाल से अफगानिस्तान और बलोचिस्तान तक और पश्चिम के पकिस्तान से हिमालय और कश्मीर के उत्तरी भाग में फैला हुआ था. और साथ ही दक्षिण में प्लैटॉ तक विस्तृत था। भारतीय इतिहास में Chandragupta Maurya के शासनकाल को सबसे विशाल शासन माना जाता है.

बिन्दुसार(Bindusaar)

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Bindusaar

बहुत से भारतीय जानते है की Chandragupta Maurya भारतीय इतिहास में मौर्य साम्राज्य के पहले शासक थे. जबकि Bindusaar अगले मौर्य शासक और Chandragupta Maurya के पुत्र थे. इतिहास में प्रसिद्ध शासक सम्राट अशोक Bindusaar के ही पुत्र थे. उन्होंने लगभग 25 सालो तक शासन किया.

Bindusaar को बहुत बड़ा साम्राज्य अपने पिता के द्वारा मिला. उन्होंने दक्षिण भारत की तरफ़ भी राज्य का विस्तार किया. Chanakya उनके समय में भी प्रधानमन्त्री बनकर रहे. बिन्दुसार को ‘पिता का पुत्र और पुत्र का पिता’ नाम से जाना जाता है क्योंकि वह प्रसिद्ध व पराक्रमी शासक Chandra gupta Maurya के पुत्र एवं महान राजा अशोक के पिता थे.

सम्राट अशोक(Samrat Ashoka)

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Samrat Ashoka

अशोक मौर्य जो साधारणत Samrat Ashoka और Ashoka  महान के नाम से जाने जाते है. सम्राट अशोक मौर्य राजवंश के एक भारतीय सम्राट थे. सम्राट अशोक भारत के महान शक्तिशाली समृद्ध सम्राटो में से एक थे. उन्होंने लगभग 41 सालो तक शासन किया.

जीवन के उत्तरार्ध में सम्राट अशोक भगवान बुद्ध की मानवतावादी शिक्षाओं से प्रभावित होकर बौद्ध हो गये और उन्ही की स्मृति मे उन्होने कई स्तम्भ खड़े कर दिये जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थल – लुम्बिनी – मे मायादेवी मन्दिर के पास, सारनाथ, बोधगया, कुशीनगर एवं आदी श्रीलंका, थाईलैंड, चीन इन देशों में आज भी अशोक स्तम्भ के रुप में देखे जा सकते है.

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, पश्चिम एशिया, मिस्र तथा यूनान में भी करवाया. सम्राट अशोक अपने पूरे जीवन मे एक भी युद्ध नहीं हारे. सम्राट अशोक के ही समय में २३ विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई जिसमें तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे. इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से कई छात्र शिक्षा पाने भारत आया करते थे.

अशोक स्तम्भ

भारत का राष्ट्रीय चिह्न ‘Ashoka Chakra’ तथा ‘अशोक स्तम्भ’ भी Samrat Ashoka की ही देंन है. ये कृतियां अशोक निर्मित स्तंभों और स्तूपों पर अंकित हैं. त्रिमूर्ति सारनाथ (वाराणसी) के बौध्द स्तूप के स्तंभों पर निर्मित शिलामुर्तियों की प्रतिकृति है.

तो अब हम कह सकते हैं की मोर्य साम्राज्य काफी बड़ा और विस्तारित है, यह हमारे भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य था और यह मोर्यो द्वारा बनाया  गया था.

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