सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में दर्शकों के दिल को छू जाती है क्योंकि दर्शक इन कहानियों से खुद को जोड़ देता है. बॉलीवुड मूवीज हमें हंसाती, रुलाती और सोचने पर मजबूर करती हैं. कभी-कभी फिल्मों की कहानी हमें अपनी ज़िन्दगी पर काफी करीब लगती हैं. जिसके कारण हम फिल्मों से जुड़ जाते हैं. इन फिल्मों की कहानी सच्ची घटनाओं पर आधारित होती हैं. बॉलीवुड में ऐसी कई फ़िल्में हैं जो सत्य घटनाओ पर आधारित हैं जिन्हें देख कर आपको पता चलेगा की स्टोरी का प्लाट कितना मिलता जुलता हैं. चलिए सच्ची घटनाओं पर बेस्ड कुछ बेहतरीन फिल्मों के बारे में जानते हैं.

वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई 

मिलन लथूरिया की फिल्म मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया को काफी करीब से दिखाती हैं. हाजी मस्तान और दाउद इब्राहिम के जीवन पर बनी इस फिल्म ने अंडरवर्ल्ड की के काले कारोबार पर नज़र डाला हैं और कैसे एक डॉन की अच्छाई और उसूलों को दर्शाया था. फिल्म ने काफी अच्छा कारोबार किया था.

शूटआउट एट लोखंडवाला

शूटआउट एट लोखंडवाला कहानी है एटीएस के चीफ ए. ए. खान की हैं, जो 16 नवंबर 1991 को 400 पुलिसकर्मियों के साथ लोखंडवाला कॉम्प्लैक्स में एक गैंगस्टर माया दोलास का एन्काउंटर करते हैं. अपूर्व लाखिया की इस फिल्म में विलेन विवेक ओबेरॉय थे, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से सभी को सरप्राइज कर दिया था.

स्पेशल 26

नीरज पांडे की इस फिल्म की कहानी रियल इंसिडेंट पर आधारित थी, इसके तार ओपेरा हाउस में की गई चोरी से मिलते जुलते हैं. नकली सीबीआई बन कर कैसे एक शख्स मशहूर ज्वेलरी वाले को करोड़ों को चूना लगा कर गायब हो जाते हैं. फिल्म में अक्षय कुमार का एक नया रूप सामने आया.

रक्त चरित्र

आंध्र प्रदेश के राजनेता के जीवन पर बनी फिल्म में विवेक ऑबेरॉय मुख्य किरदार में हैं. एक नेता की असल जिंदगी में उतार चढ़ाव और सत्ता तक पहुंचने के संघर्ष को फिल्म में काफी बखूबी से दिखाया हैं. इस फिल्मो को दो पार्ट में रिलीज़ किया गया.

नोट ए लव स्टोरी

टेलीविज़न प्रोडूसर नीरज ग्रोवर के मर्डर के लिए मारिया सुसाइराज और एम एल जेरोम को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था. यह फिल्म नीरज ग्रोवर के मर्डर की सत्य घटना पर आधारित थी. रामगोपाल वर्मा ने सिर्फ 20 दिनों में ये फ़िल्म शूट कर ली थी. इस फिल्म में माही गिल मारिया सुसाइराज के भूमिका में थी.

एयरलिफ्ट

रुस्तम की तरह ही बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार की ये फिल्म भी सच्ची घटना पर आधारित थी. 1990 में इराक और कुवैत के बीच अचानक युद्ध छिड़ने के बाद कुवैत से 1 लाख 70 हज़ार भारतीयों को घर वापस भेजा जाता है, जिसमें एक बिज़नेसमैन की अहम् भूमिका होती है. अक्षय कुमार ने फिल्म में बिज़नेसमैन रंजीत कटियाल की दमदार भूमिका निभाई. उनकी पत्नी के रोल में निरमत कौर का अभिनय भी दर्शकों को पसंद आया.

दंगल

साल 2017 के अंत में रिलीज़ हुई दंगल सब फिल्मों पर भारी रही. दंगल ने बॉक्स ऑफिस पर भी दंगल मचा दिया महावीर फोगाट के किरदार में आमिर ने अपनी शानदार एक्टिंग से जान डाल दी, वहीं गीता और बबीता के रोल में फातिमा सना शेख व सान्या मल्होत्रा भी गजब की लगीं. मां के रोल में सांक्षी तंवर भी बेहतरीन लगीं. ये फिल्म आमिर ख़ान के लिए नए साल का बेहतरीन तोहफा साबित हुई. नोटबंदी के बावजूद इस फिल्म की कमाई पर कोई असर पड़ता नहीं दिखा.

एम. एस. धोनी द अनटोल्ड स्टोरी

2016 में जिन फिल्मों की सबसे ज़्यादा चर्चा रही, उसमें इंडियन क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की ज़िंदगी पर बनी ये फिल्म भी शामिल है. धोनी की भूमिका में सुशांत सिंह राजपूत ने दर्शकों का दिल जीत लिया. सुशांत ने धोनी जैसा लुक पाने और क़िरदार को रियलिस्टिक दिखाने के लिए ख़ूब मेहनत की. फिल्म थोड़ी लंबी थी, फिर भी दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रही. इसके ज़रिए लोगों को क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की मैदान से अलग पर्सनल ज़िंदगी के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला. यह फिल्म महेंद्र सिंह धोनी के उपर बनी थी.

नीरजा

महज़ 23 साल की छोटी-सी उम्र में आतंकियों के चंगुल से 379 लोगों को बचानेवाली फ्लाइट अटेंडेंट बहादुर नीरजा भनोट की ज़िंदगी पर बनी इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों को छू लिया. 1986 में हुए एक प्लेन हाइजेक में नीरजा भनोट ने अपनी जान पर खेलकर यात्रियों की जान बचाई थी. अभिनेत्री सोनम कपूर ने नीरजा के रोल में जान डाल दी. ये उनके करियर का अब तक का बेस्ट परफॉर्मेंस रहा. फिल्म में एक जगह सोनम कपूर राजेश खन्ना का फेमस डायलॉग बोलती हैं, ‘ज़िंदगी ब़ड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं.’ नीरजा ने सचमुच इसी फलस़फे पर ज़िंदगी जी. हाल ही में फिल्म के निर्देशक राम माधवानी को इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का स्टार स्क्रीन अवॉर्ड मिला. साथ ही फिल्म को बेस्ट स्क्रीनप्ले और शबाना आज़मी को इस फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला.

गुलाब गैंग

बुंदेलखंड इलाके की महिला कार्यकर्ताओं की कहानी है, जो महिला सशक्तिकरण को बयान करती है. जूही और माधुरी ने बिल्कुल विपरीत किरदार किया है, माधुरी न्याय के लिए लड़ती हैं, जबकि जूही चावला जिद्दी राजनेता बनी हैं. यह कहानी संपत लाल की हैं, जो गुलाब गंग की मुखिया हैं.

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