शहीदों के बच्चें अब सरकार की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय ने शहीदों के परिवार को एक बेहद बड़ी राहत की साँस दी हैं. शहीद,विकलांग,लापता अफसरों और जवानों और बच्चों के शिक्षा के लिए Tution और हॉस्टल फीस की भुगतान सीमा 10000 रूपये को हटा दिया गया हैं. इस आदेश मंत्रालय ने दिया सरकार द्वारा इस सीमा को सीमित करने पर सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने दुख जतया था.

Ministry of Defence ने दिया आदेश 

रक्षा मंत्रालय ने आदेश को वापस लेते हुए ऑफिसर रैंक, और अधिकारी रैंक से नीचे के शहीदों के बच्चों का पूरा शैक्षिक खर्च उठाने का फैसला किया हैं. इस फैसले का लाभ विंकलाग, लापता सैनिकों के साथ जंग के दौरान शहीद हुए सैनिकों के बच्चों को भी मिलेगा. जानकारी की माने तो सरकार ने इस फैसले का ऐलान केंद्रीय बजट में ही कर दिया था.

आपको बता दे जिन बच्चों को हॉस्टल और tution

आपको बता दे जिन बच्चों को हॉस्टल और tution फीस की Limit 10 हजार करने के कारण मुश्किल हो रही थी उनकी माताओं ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था. सूत्रों ने बताया कि तीनों सेनाओं की ओर से भी इस बारे में रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा गया था. पंजाब के चीफ मिनिस्टर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को लिमिट तय करने का फैसला वापस लेने का अनुरोध किया था.

ये स्कीम तीनों सेनाओं के लिए हैं. 1971 की भारत-पाक जंग के बाद शुरूआती स्कीम सामने आई थी,इनमें tution और अन्य खर्च का पूरा पैसा मिलता था. Tution और हॉस्टल फीस की भुगतान 10,000 तक कर दी गई थी. यह फैसला 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित बताया गया, लेकिन अब सरकार ने फिर से पुरानी व्यवस्था कर दी हैं. ये बहुत बड़ी और आने समय में बेहद लाभकारी परिणाम लेकर आएगा ये फैसला. क्यों जवान हमारे देश की आन बान और शान हैं.

इनकी देखभाल सरकार नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा. ये अध्याय स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए. जवानों ने ना जाने कितने जान गवाए. किसके लिए?. इस देशवासियों के लिए ताकि सभी अपने घरों में चैन से सो सके और अपना जीवन यापन कर सकें.

प्रमुख बिंदु:-

  • अब सरकार लेगी जिम्मेदारी.
  • रक्षा मंत्रालय ने लिया फैसला.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here