सनातन धर्म के सबसे बड़े तपस्वी
सनातन धर्म के सबसे बड़े तपस्वी

सनातन धर्म की स्थापना न ही राजा, न योगी न ही मुनियों ने, किसी ने नही की. सनातन धर्म एक शाश्वत धर्म है. आज हम इसी सनातन धर्म के सबसे बड़े तपस्वीयों की बात करने जा रहे है. जो आदि काल में विशिष्ट कर्म के लिए जाने गए. जिन्हें हम आज भी याद करते है. ये साधारण मनुष्य नही थे बल्कि घोर तपस्या बाद ये सनातन धर्म के बड़े युग पुरुष के नाम से भी जाने गए.

आइए जानते ये किस युग में जन्म लिया और इनकी क्या तपस्या रही.

  1. तुलसीदास :-

    कालिदास हिंदी भाषा के महान कवि थे. इनका जन्म 1511 में शोरो शुकरक्षेत्र में हुआ था. इन्हें रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है. रामचरितमानस लोक ग्रन्थ है और इसे बेहद भक्ति भाव से पढ़ा जाता है. तुलसीदास ने काल क्रमानुसार निम्नंलिखित रचनाएँ की है वो है क्रष्ण गीतावली,दोहावली,कवितावली इत्यादि है.

  2. परशुराम :-

    परशुराम को भगवान विष्णु का 6वा अवतार भी कहा जाता है. वे भगवान विष्णु के आवेशाअवतार थे. परशुराम का उल्लेख रामायण,महाभारत,भागवत पुराण में मिलता है. सबसे बड़े प्रसिद्ध वे इसलिए भी हुए क्यूंकि उन्होंने क्षत्रियों का वध 21बार धरती से किया जिसकी वजह से उन्हें क्रूर की भी संज्ञा दी जाती है. उनके जाने माने शिष्य की बात करें तो उसमे द्रोर्ण,भीष्म,कर्ण जैसे महयोधा शामिल है.

  3. स्वामी रामानान्दार्चार्य:-

    स्वामी को भारतीय मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन का महान संत माना जाता है. उन्होने रामभक्ति की धारा को नीचे से नीचे तबके के लोगों तक पहुँचाया. रामानंद पहले ऐसे आचार्या हुए जिन्होंने भक्ति का प्रचार प्रसार किया. स्वामी रामानंद का जन्म 1400 इसवी में इलाहाबाद के प्रयाग में हुआ था. रामानंद ने भक्ति का प्रसार प्रचार करने के लिए पुरे देश की यात्राएँ की. जिससे भक्ति का मर्ज प्रसस्त हो सके और लोग अधिक से अधिक भक्ति भाव को जाने पहचाने और फिर उसे अपने जीवन में उतारे.

  4. द्रोणाचार्य:-

    द्रोणाचार्य ऋषि भरद्वाज के पुत्र थे और परशुराम के शिष्य भी थे. कुरु प्रदेश में पांडव के 5 पुत्र और कौरव के 100 पुत्रो के गुरु थे. गुरु द्रोणाचार्य के शिष्यों में एकलब्य का नाम भी सबसे ऊपर है. गुरु द्रोणाचार्य के शिष्यों में अर्जुन का नाम सबसे ऊपर है.

  5. गुरु वशिष्ठ:-

    अगर बात करें गुरु वशिष्ठ की तो ये सुर्यवंश के कुलगुरु थे. इन्ही के परामर्श पर महाराज दशरथ ने पुत्रेस्टी यज्ञ का आयोजन किया जिसके फलस्वरूप राम,लक्षमण,भारत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ. चारों भाइयो को वेदों की शिक्षा गुरु ने ही कराई थी. गुरु की गणना सप्तऋषियों  में भी होती है.

  6. आदि शंकराचार्य:-

    उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई उनकी टीकाएँ प्रसिद्ध है. इन्होने 4 मठो की स्थापना की जो की है द्वारका पीठ,शारदा पीठ,बदरिकाश्रम, शृंगेरी पीठ. शंकर आचार्य का जन्म 788 इसवी में केरल में हुआ. भारतीय संस्कृति के विकास और संस्कृति में शंकराचार्य का विशेष योगदान रहा.

प्रमुख बिंदु :-

कौन-कौन है सबसे बड़े तपस्वी?

जाने सनातन धर्म में कौन रहे सबसे महान ऋषि?

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