SC / ST भारत बंद इस मुद्दे के परिपेक्ष में एक सीधी बात आपसे करना चाहता हूँ. भारत दुनियाँ भर में अनेकता के लिए जाना जाता है, साथ ही दुनियाँ ये भी जानती है की भारत कई तरह की परम्पराओं को एक साथ रहने के लिए बहुत ही खुबसुरत देश है.

लेकिन यह SC / ST भारत बंद संकोच का विषय है की भारत भूमि के कुछ पूत अपने आप को देश में ही पराया मान बैठे हैं. आजादी के बाद से ही कुछ विशेष दर्जे के देश वासियों के मन से भय और कुंठा निकालने के लिए उस समय की वर्तमान सरकार ने आरक्षण की ताकत उन्हे सौंपी, लेकिन उन विशेष वर्ग के भारतीयों को कई दशकों के बाद भी अपनी स्थिति में सुधार महसूस नही हुआ.

इस आरक्षण के भेदभाव के कारण हजारों काबिल प्रतिभाएं उपेक्षा के शिकार होकर व्यर्थ हो रही हैं, जब ज्ञान और संस्कारों का अर्जन स्वयं के अधिकार में होता है तो कुछ लोगों के मन में दूसरों के प्रति डर क्यों है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट को आखिर ये बदलाव क्यों किया?

भारत में प्रतिभा खोज कार्यक्रम बिना भेदभाव के चल रहे हैं, शासकीय अशासकीय परीक्षाओं में आरक्षण के आधार पर चयन प्रक्रिया लागू है, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट को आखिर ये संज्ञान क्यों लेना पड़ा, जिसके कारण आज आप सर्वोच्च अदालत के विरुद्ध सम्पूर्ण भारत में बंद का ऐलान कर बैठे हैं?

आप स्वयं सोचिये जब एक वर्ष 4546 में मामलों में, परीक्षण होता है, और उमसे से मात्र 701 मामलों में दोषी पाए गए, जबकि 3845 मामलों में आरोपी निर्दोष साबित हुआ या मुक्त कर दिया गया. इसलिए इन मामलों में सजा प्राप्ति की दर 15.4% रही, जबकि मामलों का लंबित प्रतिशत 90.5% पर था.

अब हम स्वयं हिसाब लगा सकते हैं की माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने इस कानून में बदलाव क्यों किया. कब तक निर्दोष लोगों की छवि ख़राब की जाएगी, और उन्हे बेवजह ही जेल में सजा काटनी पड़ेगी?

वो लोग क्यों चुप रहे?

जिस समय आरक्षण दिया जा रहा था उस समय देश के किसी वर्ग ने इस SC / ST भारत बंद की तरह कोई विरोध नही किया, बल्कि आज तक इस आरक्षण को ख़त्म करने के लिए जन सामूहिक आन्दोलन नही किए गए, भारत बंद नही किया गया, रेल नहीं रोकी गई और न ही कानून को अपने हाथों में लिया गया. चाहे सामान्य वर्ग हो या अन्य कोई और भारत के संविधान में पूर्ण आस्था रखता है, और उसकी विवेचना करने की एक लौती संस्था माननीय सुप्रीम कोर्ट के हर एक आदेश और निर्देश को सिरोद्धार्य करते आए हैं.

किसी बड़े कवि के शब्द है – आएगा वक़्त तो दिखाएगें तुम को अपना ख़ुलूस, अभी खामोश हैं, हमको बस खामोश ही रहने दो.

लेकिन आज ये किस ब्यवहार को जन्म दिया जा रहा है जो माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है?

भारत में केवल एक शासन चलता है वो है “संविधान”, और ये संविधान जब निर्मित हुआ तो बाबा साहब आंबेडकर जी स्वयं मुख्य भूमिका में थे, उस समय यदि वो आरक्षण को देश हित में समझते तो संविधान में ही आरक्षण प्रस्तुत कर देते, और SC / ST भारत बंद जैंसे किसी अपराध की आवश्यकता ही नही होती. लेकिन यदि उन्हौंने समानता के अधिकार की बात की तो सबको यह ध्यान में रखना चाहिए की समानता दोनों पक्षों को एक सामान अधिकार देने से उपजती है. यदि आरक्षण के वजन को एक पलड़े में रखेंगे तो यह संविधान की भावना का उल्लंघन होगा.

जो विशेष वर्ग के देशवासी स्वयं को बाबा साहब का अनुयायी मानते हैं उन्हे इस बात का बोध होना चाहिए की जिस वेदना से आपके पूर्वज गुजरे होंगे उसमे इस पीढ़ी का कोई दोष नहीं था, लेकिन जिस उपेक्षा से आज भारत का वर्तमान और भविष्य दोनों गुजर रहे हैं उसमे आप अपना योगदान दे रहे हैं.

यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश दिया है तो उसे सर्वमान्य माना जाता है, यही भारत का भूत, वर्तमान और भविष्य है क्योंकि भारत एक प्रजातंत्र है और यहाँ हर एक नागरिक संविधान के अंतर्गत ही जी रहा है, चाहे वो व्यक्ति हो या स्वयं सरकार.

SC / ST भारत बंद आपकी दूषित मानसिकता और बगावत का स्वर है, जो प्रजातंत्र में अपराध है

संविधान सर्वोच्च कानून है, और माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोच्च दिशा, और इस अपराध में भारत भूमि में उपजा कोई राष्ट्रभक्त आपको सहयोग नही देगा…

जय हिन्द

 

लेख nukkadtalks के लेखक द्वारा प्रस्तुत!

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