सेना को चुप रहना सिखाएंगे बड़बोले नेता कश्मीर पर भारत सरकार के वार्ताकार मे बुधवार को सुरक्षा बलों को घाटी में “संयम दिखा” रखने और “नागरिक हत्याओं” का अंत करने का आग्रह किया. जिसमें हाल में एक हुए घटनाओं के रूप में इस क्षेत्र में हिंसा मे बढ़ोतरी हुई हैं.खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा ने एक साक्षात्कार में कहा, “नागरिक हत्याओं को रोकना होगा. सुरक्षा बलों को संयम दिखाना चाहिए और असंतुलन गोलीबारी नहीं करना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “मैं बेहतर होने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन हिंसा हर एक दिन बढ़ती जा रही हैं. दक्षिण कश्मीर घाटी के जिलों मे लोग विशेष रूप से विमुख और गुस्सा हैं. हमें कश्मीर के लोगों के साथ किसी भी हालत मे संवेदनशील होना चाहिए.”

दिनेश्वर शर्मा कों  23 सितंबर कों केंद्र द्वारा एक विशेष प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया था. ताकि सभी stakeholders के साथ निरंतर बातचीत हो सके.जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कई दौरे किए, जिनमें एक फरवरी को घाटी मे हुए . एक विरोध के दौरान वहीं 27 जनवरी कों सेना की गोलियों से तीन नागरिकों की मौत हो गई थी. 4 मार्च को दो आतंकियों की हत्या की गई.

वार्ताकार के रूप में प्रभारी लेते ही घाटी की अपनी पहली यात्रा की

वार्ताकार के रूप में प्रभारी लेते ही घाटी की अपनी पहली यात्रा की . शर्मा ने पहली बार पत्थर के पटरों के खिलाफ मामलों की वापसी की सिफारिश की. यह फैसला कुछ दिनों बाद नवंबर में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घोषित किया था.सद्भावना के संकेत के रूप में करीब 4,000 पत्थर के पंटरो के खिलाफ मामले वापस ले लिए गए थे.सेना ने अब इस फैसले पर सवाल उठाया हैं.सेना प्रमुख जनरल बिप्पीन रावत ने 23 फरवरी को कहा था, “इन मामलों को सद्भावना के संकेत के रूप में वापस ले लिया गया था, लेकिन वे क्या सद्भावना दिखा रहे हैं?.

सेना के अधिकारी, मेजर आदित्य (कुमार) के नाम पर सेना और राज्य सरकार के बीच हालिया हफ्तों में एक तनाव सा आ गया हैं. पत्थर के पंटरो ने मेजर पर पत्थर से हमला किया था. मुफ्ती ने नागरिकों की हत्या में एक मजिस्ट्रेटिक जांच की घोषणा की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस को सेना की जांच करने से रोक दिया और कहा, ” (मेजर आदित्य कुमार) एक सेना अधिकारी है, अपराधी नहीं हैं.”

शर्मा ने कहा कि वह संकटग्रस्त जिले में वापस जाने और युवा लोगों के साथ जुड़ने की योजना बना रहे हैं

शर्मा ने कहा कि वह संकटग्रस्त जिले में वापस जाने और युवा लोगों के साथ जुड़ने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं फिर से घाटियों का दौरा करूंगा,” उन्होंने कहा, “जब मैं कश्मीर को संकट में देखता हूं तो मुझे बहुत दुख होता हैं.”

केंद्र में कई सरकारों ने जम्मू और कश्मीर के लोगों के साथ जुड़ने के लिए वार्ताकार नियुक्त किए थे. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने इसी तरह माखिल में कथित फर्जी मुठभेड़ में तीन नागरिकों की हत्या के बाद, 2010 में अशांति के बाद पत्रकार Dilip पदगांवकर के नेतृत्व में वार्ताकारों की एक टीम नियुक्त की गयी  थी. टीम की रिपोर्ट अभी भी सार्वजनिक नहीं हुई हैं.

प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:-

  • कश्मीर पर भारत सरकार का कहना सेना संयम बनाएं
  • हिंसक घटनाओं को रोका जाए
  • दिनेश शर्मा का कहना उम्मीद बेहतर की थी पर और बिगड़ गयी.
  • शर्मा का कहना घाटी का दौरा फिर से करेंगे

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