शरियत कुरान शरीफ में सिर्फ एक बार लिखा गया शब्द है, जिसे मुहोम्मद साहब ने जिंदगी जीने का एक तरीका बताया है. लेकिन आज शरियत के नाम पर दुनियाँ भर में दहशत और खूनी कारनामों ने शरियत को इन्सान  के दिल में सिर्फ और सिर्फ डर बन के रह गया है. और सबसे हैरत और शर्मिंदगी की बात ये है की ये शर्मिंदगी इस्लाम के ठेकेदार बने कुछ muslim लोगों ने ही दी है.

इस्लाम को प्यार और शांति का धर्म बनाकर गए थे पैगम्बर साहब और इन हैवानों ने इंसानों के इस हँसते खेलते संसार में क़त्ल ए आम मचा दिया.

अचरज इस बात का है की इनको रोकने वाला कोई खड़ा नही हुआ. शायद इसलिए की उनके खुद के बच्चे मलवे के अन्दर से नही निकाले गए, खुद की बेटी को पत्थरों से मार कर मौत के घाट नही उतारा गया, खुद के बेटे की लाश हाथों में नही आई… इसलिए दर्द नही होता.

आज मेरे दिल में सिर्फ देखने से ही इतना दुःख है तो उनके दिलों पर क्या बीत रही होगी जिनके अपनों को सरे बाजार गोली मर दी जाती है, किसी चौक पर फांसी पर लटका दिया जाता है, और सिर्फ शरियत के नाम पर.

3 तलाक पर शरियत का हवाला देने वालों ने कभी सोचा है की शरियत में तो ये भी कहा गया है की चोर के हाथ काट दिए जाएँ… किसी muslim को चोरी के इल्जाम में हाथ काटने की सजा दी गई भारत में? उसके हाथ कटवाने के लिए बवाल क्यों नही किया? लेकिन आज जब मजबूर बहु बेटियों के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए कानून आया तो शरियत याद आने लगी?

मैं मानता हूँ की शायद मेरी जानकारी इस्लाम मानने वाले लोगों से ज्यादा नही होगी, पर मैंने फिर भी कोशिश की है, और आज मैं अपनी बात रखूँगा. जिसे जो समझान है समझे, पर मेरे मन की आवाज मैं आज सुनाऊंगा. आइये मैं आपके साथ अपनी जानकारी के आधार पर शरियत को समझने की कोशिश करता हूँ.

शरियत का संबंध:-

शरियत का सीधा संबंध है अपने जीवन यापन को अलग-अलग तरीके से जीने को शरियत के नाम से जाना है. इस्लाम धर्म ने अनुयायी इस शरियत को अपनाते है. लेकिन क्या शरियत में तीन तलाक को गलत नही माना गया है. औरतों पर चले आ रहे इतने सालों से जुल्म को अब छुटकारा मिला है. क्या तीन बार तलाक तलाक कह देने से तलाक हो जाएगा अगर हो जाएगा तो उनकी जिंदगी का क्या उनके बच्चों का क्या?. उनकी देखभाल कौन करेगा. शरियत को ढाल बनाकर औरतों पर हो रहे अत्याचार पर छुटकारा मिलना जरुरी है. आखिर वो भी आम इंसान है.

ये क्या बात हुई जब चोरी करने की बात आई, डाका डालने की बात आई तो हम शरियत को भूल जाते है और और जब तीन तलाक की बात आती है तो बेहद चिंतिंत हो उठते है. ऐसा क्यूँ?. हमारे भारतवर्ष में जितनी आजादी से जितनी सहजता से मुस्लमान रहते है उतने कोई भी अन्य मुल्क में नही रहते.

ये समझना होगा. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे भारत में शरियत को अमल करना मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मदद से होता है. ओवैसी का नाम आपने सुना है ये अध्यक्ष है. ओवैसी सब की जुबान बस चुनाव के समय खुलती है. वो मुस्लिम समुदाय को एक अलग विचारधारा की तरफ ले जाने में लगे हुए है. समाज चाहे हिन्दू का हो या मुस्लिम का हो हम सब एक है ओवैसी सब को कौन समझाए.

शरियत में शादी को लेकर क्या कहा गया है?

शरियत में क्या ये नही लिखा की आपको कितनी शादियाँ करनी है. मानते है ये आपका हक़ है लेकिन इसका मतलब ये तो नही की आप जितने जी चाहे उतनी शादियाँ कर सकते है. उसका सीधा प्रभाव देश पर पड़ता है. आप इस देश के नागरिक है इसलिए आपको ये सोचने का समझने का पूरा हक़ है की आप शादियाँ कम करें. शादियाँ कम होंगी तो आप परिवार का ठीक ढंग से ख्याल रख पाएंगे. अगर शरियत में ये सभी चीजे नही लिखी गई तो क्यों आप शरियत का हवाला हर बार देते रहते है.

आप सही के साथ खड़े रहेंगे तो आपका साथ हर कोई देगा लेकिन अगर आप गलत है तो गलत है. आप कानून की लोगों की हर कोई की नजरो के सामने है. ये निर्णय लेना की आप जब जी चाहे आप शरियत का नाम लेंगे और बच जाएंगे. समाज जागरूक हो चुकी लोग यहाँ तक जागरूक हो गये शिक्षित हो गये तो शरियत का नाम अलापना बंद कीजिए और बात को तराजू पर तौल कर देखिए क्या सच है और क्या गलत. ये सारी बातें अगर अपने आप पर लेकर देखिएगा तो आप खुद बा खुद समझ जाएंगे. अपने लाइफ स्टाइल को बदलने के लिए किसने आपसे कहा था.

शरियत में बाल बच्चों की संख्या को लेकर क्या कहा ?

आप अपने मन से बिना किसी कानून के लाइफस्टाइल के अपनी जिंदगी खुद ही जी सकते है. shariyat में क्या ये लिखा है की आप जितने जी चाहे उतने बच्चे कर सकते है. क्या अनगिनत बच्चे करने का भगवान से परमिट लेकर आए है. शरियत में ऐसा कुछ भी नही लिखा. थोड़ा रहम करो और बच्चे कम करे ताकि आप पालन पोषण अच्छे ढंग से कर सकते है. आप कम से कम सुकून भरी जिंदगी बेसक दे सकते है. जितने बच्चे कम होंगे उतने अच्छे ढंग से आप उन्हें पल पोष सकेंगे. आप इस बात का नियंत्रण रखे और इस बात का ध्यान रखे की आने वाला समय इससे कही अधिक महँगा रहने वाला है.

shariyat ना ही तो किसी प्रकार का कानून है और ना धर्म. ये बात आप दिमाग में बैठा ले. अगर आप ऐसे काम कर रहे है जो कानून के खिलाफ है समाज के खिलाफ है और देश के खिलाफ है तो वो धर्म से कही अधिक ऊपर उठकर होता है. देश से ऊपर और देश से सर्वोपरी कोई नही होता है.

क्या लिखा है शरियत में ?

shariyat में क्या लिखा गया है आप क़ुरबानी देंगे तभी आपको जन्नत नसीब होगी. नही लिखा गया है कही भी. अगर नही लिखा गया है तो ये गुनाह है तो इसकी सजा भी दी जनि चाहिए. अब आप ये ना कहियेगा की शरियत में ये नही ये कहा गया है.

shariyat किसी को को भी ऐसा करने की गवाही नही देता है. की कभी आपने ये सोचने की कोशिश की है आपकी क़ुरबानी के चक्कर में जानवर हो या इंसान दुःख सभी को होता है. कुराब्नी में आपने किसी जन्वार्र को उठाया और क़ुरबानी कहकर मार दिया. क्या आपमे थोड़ी सी भी देता नाम की चीज नही है. अगर नहीं है तो आपको जीने का भी कोई अधिकार नही है.

आपके अगर खुदा ना खस्ता बेटे की या किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है क्या आपको दुःख नही होगा क्या आप रोएंगे नही. अगर हा तो तो क्यूँ नही क़ुरबानी में. बहुत सुना गया है की क़ुरबानी मुसलमानों को सीखना चाहिए आखिर क्यों और किसलिए इंसानियत को खत्म करने के लिए या जड़ से उखाड़ कर फेंक देने के लिए. क्या ये गलत नही है. किस मजहब किस इमाम में या किस कोर्ट की नियम में लिखा हुआ है की कुर्बानी सीखना अनिवार्य है. उम्मीद है आपको ये समझ आ गया होगा की shariyat कोई कानून नही बस जीने का जरिया है. आप इसे अमल कर भी सकते है और नहीं भी.

प्रमुख बिंदु :-

जाने क्या है शरियत?.

क्या शरियत है धर्म या कुछ और?.

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