शास्त्रों में बलात्कारी के लिए क्या दण्ड निर्धारित है ?
शास्त्रों में बलात्कारी के लिए क्या दण्ड निर्धारित है ?

आज देश में आए दिन बलात्कार आम बात हो गई है. चाहे वो छोटी बच्ची हो या बड़ी लड़की को क्या बलात्कारी पुरुष की दण्ड नही मिलना चाहिए?. क्या वो किसी भी बच्ची,लड़की का अपराध करके चंद दिनों बाद छुटने के बाद आजाद घूमेगा. क्या यही सही है और क्या यही न्याय उसे मिल रहा है जिसके साथ उसने निर्मम तरीके से बलात्कार जैसे नीच अपराध किए है. आज हम आपको बताने जा रहे शास्त्रों में बलात्कारी मनुष्य के लिए क्या दण्ड विधान निर्धारित थे.

शास्त्रों में बलात्कार के लिए दण्ड :-

भारतीय संस्कृति की बात करें तो सबसे अधिक उपेक्षा की गई है की वो ऐसा कोई अपराध ना करें जिससे दुसरे लोगों को पीड़ा पहुचे. बलात्कार हो हेमशा अमानवीय माना गया है. भारतीय संस्कृति में बलप्रयोग से सेक्स संबंध स्थापित करने करने को गलत बताया गया है. मनुस्मृति में बलात्कार को गलत ठहराते हुए इससे गलत बताया गया है. आइए जानते है क्या है सजा.

दण्ड का प्रावधान :-

भारत के प्राचीन विधि शास्त्री ने बलात्कार के लिए दण्ड का विशेस प्रावधान बनाया है. जिस बात को ध्यान में रखे जाने का निर्देश दिया गया है वो है स्त्री का विवाहित या अविवाहित होना. क्या क्या कहा गया है आइए जानते है.

बृहस्पति : बलात्कारी की सम्पत्ति हरण करके उसका लिंगोच्छेद करवाके उससे गधे पर बिठाकर घुमाया जाए.

कात्यान : बलात्कारी को मृत्युदंड दिया जाना.

नारद स्मृति : बलात्कारी को शारीरिक दण्ड दिया जाना चाहिए.

कौटिल्य : सम्पत्ति हरण करके कता अग्नि में जलाने का दण्ड.

याज्ञवल्क्य: सम्पत्ति हरण कर प्रण दण्ड दिया जाना चाहिए.

मनु स्मृति: एक हजार पण का अर्थदण्ड, निवार्सन, ललाट पर चिन्ह अंकित कर समाज से बहिष्कृत करने का दण्ड दिया जाना चाहिए .

अविवाहित कन्या के साथ दण्ड विधान क्या-क्या थे?

  1. लिंगोच्छेद करना.
  2. दो उंगलियाँ काटना.
  3. दो सौ पण अर्थ दण्ड.
  4. मृत्युदंड.

मनुस्मृति में दण्ड विधान इस प्रकार से निर्धारित किये गये है

8.323 में जो लोग महिलाओं को अगवा करते है उन्हें मौत की सजा दी जानी चाहिए. 9.232 जो लोग महिलाओं, बच्चों या विद्वानों के धार्मिक लोगों को मारने उन्हें कठोरतम सजा दी जानी चाहिए. 8.352 जो लोग बलात्कार या महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या उन्हें व्यभिचार में उत्तेजित सख्त से सख्त सजा कि दूसरों के बीच भय पैदा करता है यहां तक ​​कि इस तरह के अपराध के बारे में सोच को खत्म कर देनी चाहिए.

 8.275 एक वह झूठे आरोपों डालता है या माँ, पत्नी या बेटी उसे नीचा दिखाता है, तो सजा दी जानी चाहिए. 8.389 जो लोग किसी भी उचित कारण के बिना उनके माता, पिता, पत्नी या बच्चों को त्याग गंभीर दंड का सामना करना चाहिए. (एक औरत के लिए) 357.

प्रसाद प्रस्तुत,, (उसके साथ) उसके गहने और पोशाक को छू, एक बिस्तर पर उसके साथ बैठने, सभी (इन कृत्यों) व्यभिचारी को कृत्य माना जाता है. 363. इसमे जो गुप्त रूप से इस तरह की महिलाओं के साथ , या एक (गुरु) द्वारा रखा महिला दास के साथ, और महिला संन्यासियों के साथ, एक छोटे से जुर्माना अदा करने के लिए मजबूर किया जाएगा ऐसा कहा गया है.

और क्या कहा गया है ?

लेकिन अगर बदतमीज़ी के माध्यम से किसी भी आदमी को जबरन एक युवती दूषित, उसकी उंगलियों के दो तुरन्त काट दी जाएगी, और वह छह सौ (सममर) का जुर्माना का भुगतान करेगा. 370. लेकिन एक औरत है जो एक युवती को प्रदूषित करता तुरन्त (उसके सिर) मुंडा या दो उंगलियों को काट नहीं होगा, और सवारी करने के लिए एक गधा पर (शहर) के माध्यम से किया जाना रखा जाता था. 385 एक ब्राह्मण जो असुरक्षित महिलाओं क्षत्रिय या वैश्य (जाति) (के) पास जाते है, या शूद्र महिला, जुर्माना किया जाएगा पांच सौ (सममर); लेकिन सबसे कम (जाति) (के) एक महिला (साथ संभोग के लिए) एक हरा जुर्माना है.

  • प्रमुख बिंदु :-
    जाने क्या थे दण्ड विधान पुराने समय में?.
  • जाने क्या किया जाता था बलात्कारी के साथ?.

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