शेषनाग की हुंकार से आज भी उबलता हैं पानी जानिए क्या हैं रहस्य?हिमाचल प्रदेश में कुल्लू से 45 किलोमीटर दूर गर्म पानी के झरनों के आस पास भगवान शिव और देवी पार्वती से जुड़ी कई कहानियाँ प्रचलित हैं. ऐसे ही एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माँ पार्वती के कान की बालि(मणि) यहाँ गिर गई थी और खो गई थी. खूब खोज खबर की गई लेकिन कान की बाली नहीं मिली.

आखिरकार पता लगा की कान की बाली पाताल लोक में शेषनाग के पास पहुंच गई हैं. जब शेषनाग को इसकी जानकारी हुईं तो उन्होंने पाताल लोक से ही फुफकार मारी और धरती के अंदर से गर्म जल फूट पड़ा. गर्म जल के साथ ही बाली भी निकल आयी. आज भी मणिकर्ण में गर्म जल निकलता हैं.

मणिकर्ण अन्य कई मनलुभावन पर्यटक स्थलों का आधार स्थल भी है

शेषनाग की हुंकार से आज भी उबलता हैं पानी जानिए क्या हैं रहस्य?

मणिकर्ण अन्य कई मनलुभावन पर्यटक स्थलों का आधार स्थल भी है. यहां से आधा किमी दूर ब्रह्म गंगा है जहां पार्वती नदी व ब्रह्म गंगा मिलती हैं. यहां थोड़ी देर रुकना प्रकृति से जी भर कर मिलना हैं. डेढ़ किमी दूर नारायणपुरी है, 5 किमी दूर राकसट हैं, जहां रूप गंगा बहती हैं. यहां रूप का आशय चांदी से हैं.

पार्वती पदी के बांई ओर 16 किलोमीटर दूर और 1600 मीटर की कठिन चढा़ई के बाद आने वाला सुंदर स्थल पुलगा जीवन अनुभवों में शानदार बढोतरी करता हैं. इसी प्रकार 22 किमी दूर रुद्रनाथ लगभग 8000 फुट की ऊंचाई पर बसा है और पवित्र स्थल माना जाता रहा हैं.

यहां खुल कर बहता पानी हर पर्यटक को नया अनुभव देता हैं. मणिकर्ण से लगभग २५ किमी दूर, दस हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित खीरगंगा भी गर्म जल स्त्रोतों के लिए जानी जाती हैं. यहां के पानी में भी औषधीय तत्व हैं.

एक स्थल पांडव पुल जो की मणिकर्ण से 45 किमी दूर हैं. गर्मी में मणिकर्ण आने वाले रोमांच प्रेमी लगभग 115 किमी दूर मानतलाई तक भी जरूर जाते हैं. मानतलाई के लिए मणिकर्ण से तीन-चार दिन लग जाते हैं. सुनसान रास्ते के कारण खाने-पीने का सामान, दवाएं इत्यादि साथ ले जाना अतिआवश्यक हैं.

प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:-

  • आज भी उबलता हैं पानी.
  • पौराणिक गाथा में उल्लेख मिलता हैं मणिकर्ण का.
  • यहाँ माँ पार्वती की गिरी थी मणि.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here