शिवराज ने चुनाव के पहले खेला दलित कार्ड – नियमों से किया खिलवाड़

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शिवराज ने चुनाव के पहले खेला दलित कार्ड - नियमों से किया खिलवाड़
शिवराज ने चुनाव के पहले खेला दलित कार्ड - नियमों से किया खिलवाड़

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शिवराज चौहान ने चुनावी साल में अहम बदलाव किए है. मध्य प्रदेश में शिवराज अपना दबदबा बनाने में कामयाब रहे है. लगातार तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में जीत कर मध्यप्रदेश की कुर्सी पर विराजमान में शिवराज. आने वाले समय में चुनाव को देख्रते हुए शिव ने दलित कार्ड खेला है. ऐसा अक्सर देखा गया है की भाजपा हमेशा कांग्रेस को जातीय समीकरण के लिए,जाति में बटवारे को लेकर हमेशा घेरे में लेता रहा है.

कैसे शिवराज ने खेला दलित कार्ड :-

रिपोर्ट की माने तो जातीय समीकरण को अपने निशाना बनाते हुए 3 नए मंत्री को अपनी टीम में शामिल किया है. जानकारी की माने तो अलग-अलग जाति को साधने की कोशिश की गई है. भाजपा भले ही ये मानने को तैयार नही हो की वो जातीय समीकरण बना रही है ,लेकिन अगर बात सियासत की करें तो हर तरफ की इसकी चर्चा जोड़ो पर है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने जातिगत आधार पर मंत्रिमंडल में हुए बदलाव को सही ठहराया है.

भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री गौर ने यहाँ तक कह डाला की ऐसे बदलाव पुरे भारत में करने पड़ेगे. उन्होने आगे कहा जहाँ जिस जाति की संख्या ज्यादा वहाँ ज्यादा प्रतिशत होना अनिवार्य है. मध्य प्रदेश में जातीय आधार पर हुए मंत्रिमंडल में बदलाव के जैसे क्या पुरे भारत में भाजपा खासकर चुनाव के पहले ऐसा ही समीकरण बनाएगी?. क्या इससे भाजपा को सफलता मिलेगी?. गौर की माने तो मध्य प्रदेश में 70% जनसंख्या पिछड़े वर्ग की है,लेकिन मंत्रिमंडल में इनकी संख्या केवल 3 से 4 ही थे. अगर बात करें अन्य समाज की उनकी संख्या ज्यादा थी.

क्या भ्रष्ट नेता भी होंगे ऐसे जातीय समीकरण में शामिल ?

 

ऐसे में तो आलम ये हो जाएगा की जातीय समीकरण की छाव में भ्रष्ट और अनैतिक नेता भी मंत्रिमंडल में शामिल हो जाएंगे. क्या ये समाज के लिए,देश के लिए,हम सबके लिए क्या ठीक है?. समीकरण तो अंग्रेजो के ज़माने में भी बहुत उपयोग हुए समाज से बांटने से लेकर,एक-दुसरे से युद्ध कराने को लेकर तो क्या समानता रही अंग्रेजो में और आज की सरकार में?. समाज के नाम पर,जाति के नाम पर सरकार इस देश को बांटना बंद करें. वरना देश की गति बढ़ेगी नही बल्कि घट जाएगी. इस समाज को,इस देश को,इस राष्ट को विकास की जरुरत है ना की जातीय समीकरण की.

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