सुहागरात कब – शादी के पहले या शादी के बाद?
सुहागरात कब – शादी के पहले या शादी के बाद?

ऐसे सवाल अक्सर आते है. क्या मैं शुरू करू ?. कही उसे बुरा तो नहीँ लगेगा. कही वो ये तो नहीँ सोचेगा की कही मैं अधिक desperate तो नहीँ?. अगर लड़के की सोचने की बात करें तो, क्या मुझे उसके Move का wait करना चाहिए?. क्या बस लड़की ये सब सोचेगी की इस लड़के ने शादी ही इसलिए की है.

Arrange Marriage नई शुरुआत नहीँ है. सदियों से चलती आ रही है. बीते समय में लोग अलग-अलग Matrimonial Website के जरिये और पहली या दूसरी मुलाकात में ही एक दूजे के होने का निर्णय ले लेते है. इन सारी चीजों में ये बस नही पता लग पाता की एक दुसरे के अनुकूल कितने है कितने नहीँ.

ये सारी अनुकूलता शादी के बाद होगी होगी भी या नहीं इसके बारे में में भी कुछ कह नहीं सकते. पुराने लोगों का ऐसा कहना है की अनुकूल होना या नहीं होना ये सारी बातें शादी के पहले रात के बाद पता लग पाती है लेकिन सच्चाई इससे बिलकुल अलग हैं. आइए जानते है ऐसी ही कुछ बातें जिससे हम सभी अनभिज्ञ है. आए जानते है क्या कहना है कुछ लोगों का :-

  1. हमने इंगेजमेंट के 3 महीने बाद नहीं किया कुछ :-

एक महानुभाव का कहना था हम एक दुसरे के करीब परिवार के जानने – पहचानने से आए. हमने एक बड़ी समारोह में engagement संपन्न किया. हम एक दुसरे के करीब मजाक करते-करते आए. ऐसी बातें जैसे Close कैसे आये engagement से पहले.

मुझे ये लग रहा था की वो इसके लिए ओके है भी या नहीँ. उसने कहा मैं अपनी virginity अपने पति या fiance के साथ ही तोडूंगी. जब मैं इसके बाद घर वापस आया तो हमने एक दुसरे को ना जाने कितनी बार डेट किया. हमने कितनी बार रूम बुक किए पर हमने कभी सेक्स नहीं किया.

हम दोनों इस मामले में कंफ्यूज थे की शादी की पहली नाईट पर ये सारी चीजे करेंगे. लेकिन तीसरे महीने में हमने अभी भी कुछ नहीं किया है. पता नहीं ये इतनी जल्दी हो रहा है या नहीं. सबसे अच्छी बात ये है की हम खुश है.

  1. तीन साल हो गए फिर भी कुछ नहीं हुआ :-

आगे उनका कहना था हम एक दुसरे को हग करते थे kiss करते थे और घंटो एक दुसरे की बाहों में बाहें डालकर बैठे रहते. हम ऐसे लेवल पर आ चुके थे की हम एक दुसरे के बिना रह भी नहीं सकते थे. मुझे लग रहा था की हम अध्यात्म के तरफ मुड़ चुके थे. वरना तीन साल में भला ऐसे कैसे हो सकत है की कुछ भी ना किया फिर भी हाथ में हाथ रहना जरुरी है. जरुरत एक दुसरे की है तो कुछ तो होना चाहिए था.

  1. आखिरकार पहली डेट पर एक दुसरे के करीब आए:-

ऐसा कैसे हुआ वो बताते है की मेरे परिवार जनों के उन्हें और उनके परिवार को पसंद किया. आखिरकार ये कहा भी तो जाता है की शादी में बस दुल्हे दुल्हन की शादी नहीं होती हैं. दो परिवार की शादी होती है. फिर क्या था बारी मेरी थी लड़की से कुछ बातें करने की कुछ कहने की.

अगले दिन हमने निर्णय किया की हम restaurant मे मिलेंगे. हमने वहां लंच किया. फिर हम वापस आ रहे थे की उन्हौंने मतलब होने वाली पत्नी ने कही पार्क में चलते है. फिर हम दोनों पार्क गए. पार्क में आस-पास कोई भी नहीं था. फिर क्या था मौके पर चौका ना लगाओ तो बहुत अफ़सोस होता है. फिर हमने उनके प्राइवेट पार्ट्स को टच किया.

फिर वो कैसे पीछे होती उन्हौंने ने भी मेरे प्राइवेट पार्ट्स को टच किया. फिर थोड़ी देर तक ऐसा चलता रहा. इसके बाद जब हम दोनों वापस आने लगे तो एक दुसरे का हाथ पकड़कर हाथो में हाथ थे और वों फीलिंग ना ही छुपाई जा सकती है और ना ही बयां की जा सकती है. वो लम्हा ही इतना खास होता है की क्या बताऐ.

  1. 2 महीने लगे जब पहली बार हुआ सेक्स :-

पहले के 15 दिन हमने होटल रूम में बिताए. फिर हमदोनों ने तय किया की हम प्रयास तो कर सकते है. जब मैंने प्रयास किया तो मेरी पत्नी चीखने लगती थी चिल्लाने लगती थी. ऐसा लगता था मुझे जैसे मैं उनका रेप कर रहा हूँ. उसकी फेस की एक्सप्रेशन ने मुझे अंदर से झकझोर दिया. ऐसा 1.5 महीने तक चलता रहा. इसके बाद मैंने एक दो प्रयास किए जिसके बाद हमारा successful sex हुआ.

  1.  शादी  की रात से बस अलग :-

अब अलग-अलग लोगों की अलग-अलग विचार है आए जानते है. एक महानुभाव का कहना था मैंने सोच रखा था मैं किसी और दिन करूँगा लेकिन शादी की रात नहीं. परंपरा के अनुसार शांति म्हुर्तम शादी की रात होता है. शादी इसी अवधि में संपन्न होती है.

  1. मेरे लिए ये शादी की दूसरी रात थी :-

हम दोनों एक साथ रूप में दाखिल हुए. लड़की क्या सोच है ये बताने जा रहे है . उसने दरवाजा बंद किया. मैं डर गई. मैं उनकी तरफ घुर रही थी, कही उन्हौंने कुछ गलत करने की सोची तो नहीं. पहले उन्हौंने कहा जाओ और कपड़े चेंज कर लो. वो मेरे सामने खड़े थे और हग करते हुए कहा जैसी तुम्हारी मर्जी. पहले एक घंटे तक वो कुछ दुरी पर लेते हुए थे. मैंने उनके चेहरे पर हाथ फेरा फिर उन्हौंने जोड़ से हग किया और एक किस किया और एक दुसरे से लिपटकर सो गए.

  1. सेक्सुअली अनुकूल पार्टनर :-

अगर आप arrange marriage कर रहे है सेक्सुअली अनुकूल पार्टनर मिले आप भूल जाए. ये मुमकिन नहीं है. मानते है जमाना बदल रहा है लेकिन एक दुसरे से बिताया समय वो आप arrange marriage में कहा से लाएंगे. लव मैंरिज में ऐसा होना खासकर मुमकिन है. अनुकूल होने से भी सबसे अच्छी चीज जो आपके पार्टनर में होनी चाहिए वों है समझदारी. अगर आपका पार्टनर समझदार है तो समझ लीजिए की वो सेक्सुअल अनुकूल ही क्यूँ कोई और बात भी क्यूँ ना हो हर तरफ से आपके लिए अच्छा है.

  1. हमने ये सब 4 महीने में कर लिया कही किसी ने मजाक उड़ाया  तो :-

सबसे पहली और इम्पोर्टेन्ट बात है ये आपकी पर्सनल लाइफ. क्यूँ कोई मजाक उड़ाएगा ?. फिर आता है आप ये बात क्यूँ किसी दुसरे कोई बताएँगे. और तो और सेक्सुअली अनुकूल होना या ना होना ये शादी के मुलभुत सूत्र नहीं है. समझदार हो एक दुसरे को समझे. ऐसा कोई रूल नहीं की आपको आपको फर्स्ट नाईट मे करना ही है. आप दोनों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता एक दुसरे इस बात का खास ध्यान रखे.

प्रमुख बिंदु :-

  • कब आए एक दुसरे के करीब.
  • क्या इसकी होती है कोई समय सीमा.

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