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शाम ढलने लगी और ये बेताबियाँ

शाम ढलने लगी और ये बेताबियाँ, दिल में फिर तेरी यादें जगाने लगी, बंद करके ये पलके भरी आह बस, तेरी खुश्बू से आँखे नहाने लगी. कई दिनों...

तुम साथ बैठी रहो तो हर कमी मंजूर है

तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है...   मुझे आह मंजूर है, आँखों की नमी मंजूर है, तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर...

उस पार न अब तुम जाया करो

  हो शाम यहीं रुक जाया करो, उस पार न अब तुम जाया करो, रौनक तो तुमसे होती है, उस पार तो दीप न ज्योति है, न राहें ज़ाहिर,...

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