तंत्र मंत्र और यंत्र में कौन सबसे ज्यादा शक्तिशाली है?
तंत्र मंत्र और यंत्र में कौन सबसे ज्यादा शक्तिशाली है?

हम आज आपको बताने जा रहे है तंत्र मंत्र और यंत्र में कौन सबसे ज्यादा शक्तिशाली है. इन तीनों की अलग-अलग परिभाषा है. उनके पहलु भी बेहद अलग-अलग है. आज हम आपको इनमे विविधताएँ क्या –क्या है ये भी बताएंगे,साथ ही साथ इनके मायने क्या-क्या है ये भी बताएंगे आपको विस्तार से.

चलिए जानते है बारी-बारी से इन सबके के अलग-अलग भेद

  1. तंत्र :-

    तंत्र परंपरा से जुड़े ग्रन्थ की है,जैसे हिन्दू जैन,बौद्ध परंपरा में पाई जाती है. हिन्दू परंपरा में तंत्र का मुख्यतः संप्रदाय से जुड़ा हुआ है. ऐसा भी कहा जाता है वेदों के बाद कही जाकर तंत्रों की रचना हुई. वैसे तो तंत्र ग्रंथो की संख्या तो हजारों में लेकिन सामान्य तौर पर तंत्र 64 कहे गए है. अगर भारत की बात की जाए तो प्राचीन काल से तंत्र बंगाल,बिहार और राजस्थान से जुड़े रहे है.

अगर तंत्र शब्द की बात करें तो ये तन यानि की धातु से बना है. तंत्र का शाब्दिक अर्थ है विधि या उपाय. कर्म कांड से लेकर पुजा उपाय के तरीके सभी धर्मो में अलग-अलग है. तंत्रों की विषय वस्तु तीन बताई गई है जो की है ज्ञान,कर्मकांड और योग्य. तंत्र का प्रभाव विश्व स्तर पर है और इसका परिणाम हिन्दू,बौद्ध और जैन दर्शनों आदि धर्मो की तंत्र साधना के ग्रन्थ है.

2. मंत्र :-

मंत्र शब्दों का संचय(समूह) है,जिसकी मदद से आप भगवान तक को प्राप्त कर सकते है. साथ ही साथ आप हर तरह की बाधा को खत्म कर लेते है. मंत्र में मन का तात्पर्य मन और मनन से है जबकि त्र का तात्पर्य शक्ति और साथ ही साथ रक्षा से भी है. इसके अगले स्टेज की बातब करें तो मंत्र से इंसान पुरे ब्रहामंड को कंट्रोल में कर सकता है. ये जितना कहना आसान है करना उतना ही मुश्किल है. मंत्र के अनेको लाभ बताए गये है जैसे शत्रु का विनाश,शक्ति की शक्ति का मौजूद होना,पाप का नष्ट होना और वाणी में हुई शुद्धि.

मंत्र के जपने और इश्वर का नाम लेने में ढेर सारी भिन्नताएं है. अगर आप भगवान का नाम लेते है उसमे किसी प्रकार के नियमों का पालन नही करना पड़ता ,जबकि अगर आप मंत्र पढ़ रहे है तो अनेको नियम का पालन करना होता है. यु कहे मंत्र जाप से जो अध्यात्मिक उर्जा मिलती है उससे आप या तो अच्छे या तो बुरे दोनों कार्यो के लिए कर सकते है. सभी प्रकार के मंत्रो में आप एक और चीज जोड़ सकते है वो है अनुशासन मंत्र में बेहद जरुरी है.

3. यंत्र :-

अगर यंत्र को साफ़ शब्दों में समझा जाए तो जैसे लोगों की रहने के लिए घर की आवश्यकता होती है उसी प्रकार देवी देवताओं को रहने के लिए किसी चीज की आवश्यकता होती है जिसे यंत्र कहते है. यंत्र को मंत्र से अलग माना जाता है लेकिन अगर सच क्या है ये जाने तो यंत्र यदि शिवरूप है तो मंत्र उनकी अंतर्निहीत शक्ति है, जो संचालन करती है और जीवन में हो रहे हर कार्यो को भी अंजाम देती है. यंत्र की अगर बात करें तो ये देवी देवताओं का प्रधिनिधित्वा करते है. तंत्र के अनुसार यंत्र में चमत्कारिक दिव्य शक्तियों का निवास होता है.

यंत्र को ताम्रपत्र पर बनाए जाते है. कुछ यंत्र भोज-पत्र पर भी बनाए जाते है. अगर हम और शब्दों में कहे कहे तो मनुष्य के लक्ष्य प्राप्ति के लिए जो माध्यम है उसे हम यंत्र के नाम से जानते है. मनुष्य की इक्षा तथा मनोकामना पूर्ण करने के लिए ये विशेष माध्यम भी हम कह सकते है. यंत्रो से व्यक्ति को देवताओं की कृपा दृष्टी प्राप्त होती है. इसके साथ-साथ प्रसन्न होकर सब कुछ मनुष्य को प्रदान करे सकते है.

प्रमुख बिंदु :-

जाने क्या है अंतर तंत्र,मंत्र और यंत्र में?.

क्या तीनों अलग-अलग है?.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here