भारत की यातायात समस्या (traffic problems) की हम बात करते है तो जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर बात करे बिना हम सही नतीजे पर नहीं पहुचं सकते है. आंकड़े बताते है की बीते एक दशक में देश की आबादी 18.1 करोड़ से बढ़कर अब तक 1.21 अरब हो चुकी है. उत्तर प्रदेश सबसे अधीक आबादी वाला राज्य है. भारत के पूर्व महापंजीयक और जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली द्वारा जारी जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार, भारत की 1.21 अरब की आबादी अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान और बांग्लादेश की कुल आबादी से भी अधीक है. अगर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आबादी के आंकड़ो को मिला लिया जाए तो दोनों राज्यों की कुल आबादी अमेरिका की कुल जनसंख्या से भी अधिक होगी.

जाहिर है अधिक आबादी का मतलब संसाधनों पर अधिक दबाव जिसका मतलब यातायात पर भी अधिक दबाव. ये इस समस्या का एक पहलू है जिसके समाधान के लिए एक लम्बी प्लानिंग की आवश्यकता होगी. समय भी बहूत लगेगा. और जनसँख्या नियंत्रीत हो जाने तक का तो इन्तेजार भी तो नहीं किया जा सकता है.  समस्या का दुसरा पहलू है वर्तमान व्यवस्थाओ में खामियां जिन पर तुरंत काम करके समस्याओं को नियंत्रण में लाया जा सकता है.

भीड़ और प्रदूषण आज भारतीय शहरों के लिए एक तरह से नरक बन गए हैं, खराब बुनियादी ढांचा और औद्योगीकरण की उच्च दर स्थिति को और बिगाड़ रही हैं. निजी वाहनों के अधिक मात्रा में सडको पर आने, सार्वजनिक परिवहनो का आभाव समस्याओ को और भी बड़ा रहा है. सब से ज्यादा समस्या लोगो में यातायात के नियमो की जानकारी के आभाव की वजह से होती है.  जैसा भी हो आज इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के यूग में बहूत से ऐसे साधन हम विकसित कर सकते है और जो हम कर भी रहे है जो समस्याओ को काफी हद तक सुधार सकते है.

आज हम देश के कुछ इसे शहरों का जायजा लेंगे जो यातायात समस्या (traffic problems) के मामले में देश में सब से आगे है.

यातायात समस्या वाले शहर

लुधियाना:

लुधियाना पंजाब के सबसे बड़े औद्योगिक शहरों में इसकी गिनती होती है. लेकिन अत्याधिक ट्रैफिक ने यंहा पर यातायात समस्या  (traffic problems)की स्थिती को बहूत गंभीर बना दिया है. निजी वाहनो की बडती हूई संख्या एक बड़ी समस्या है.  लम्बे समय से यहाँ के बुनियादी ढांचे में कोई सुधार नहीं किया गया है.

 

कानपुर

कानपुर कारखानों और उद्योगों के लिए एक बड़ी पहचान रखता है. आपको जानकार आश्चर्य होगा की कानपुर प्रदूषण और औद्योगिक कचरे के लिए भी जाना जाता है. हालांकि, एक चोट मन को तब लागती है जब हम यहाँ की यातायात समस्या (traffic problems) की बद से बदतर होती स्थिति को देखते है.  पैदल यात्री, सडको पर पार्किंग, घटिया रोड समस्या को और अधिक गंभीर बनाते है. यंहा पर वाहनो की ओसत गति लगभग 16 किलोमीटर प्रति घंटा है. फुटपाथ, पार्किंग एप्लीकेशन, और सार्वजनिक परिवहन का आभाव इसे और भी बदतर बना देता है.

जयपुर

पुरानी और एतिहासिक जयपुर सिटी जहां अपने पुराने अतीत के लिये विख्यात है वही बिगड़े ट्राफिक के मामले में भी उतनी ही बदनाम. संकीर्ण सड़के एवं बुनियादी ढांचे का आभाव और भीड़ लोगो की यात्रा को मुश्किल बना देते है. अत्याधिक बड़ा हुआ ट्राफिक शहर की यातायात समस्या (traffic problems) को जैसे विकराल बना देता है. यंहा पर एसे व्यक्तियो की संख्या बहूत अधिक है जिनके पास एक से अधिक निजी वाहन है. जिनमे कई वाहन तो रजिस्टर्ड तक नहीं होते है.

चेन्नई

चेन्नई की सड़के ड्राइव करने के लिहाज से बड़ी मुश्किल है. इस शहर की गिनती भी यातायात समस्या (traffic problems) के मामले में सबसे खतरनाक शहरों में होती है. सकडी सड़के और बुनियादी ढांचे की कमी ही यंहा की मुख्य समस्या है. दोषपूर्ण ट्राफिक व्यवस्था यहां की एक सबसे महत्वपूर्ण कमी है.

 

हैदराबाद

हैदराबाद में अन्य शहरों की तुलना में अच्छा यातायात ढांचा और व्यापक सड़के हैं. परन्तु लोगो में ट्रैफिक जागरूकता का आभाव मुख्य समस्या है.  शहर में लगभग 3.3 मिलियन निजी वाहन हैं और इनकी संख्या भी लगातार तेजी से बढ़ रही है और यातायात समस्या (traffic problems) की स्थिती और अधिक गंभीर होती जा रही है. आईटी हब होने के कारण हैदराबाद बहुत से लोगो की पसंद भी है और जनसँख्या में ऐसी बढोत्तरी स्थिति को और ज्यादा गंभीर बनाती है.

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