ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर - सुप्रीम कोर्ट की नजर निकाह हलाला की वैधता एक तलाकशुदा पत्नी का पुनर्विवाह करने की जटिल प्रक्रिया और मुसलमानों के बीच बहुपत्नी की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाएगी, जिसमें सात महीने पहले ‘ट्रिपल तालक’ को असंवैधानिक घोषित किया गया था.

सर्वोच्च न्यायालय के संविधान खंड, जिसमें पांच वरिष्ठ और सबसे अधिक न्यायाधीश होंगे, दो प्रथाओं की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली चार याचिकाएं सुनेंगे. दो मुस्लिम महिलाओं और एक भाजपा के वकील सहित याचिकाकर्ता, जो उच्च न्यायालय को इन दोनों प्रथाओं को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने के लिए मौजूद रहेंगे. अदालत ने पहले ही केंद्र और अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को नोटिस जारी कर दिया है.

निकाह-हलाला तलाक की घटना को रोकने के लिए एक अभ्यास है इसके तहत, एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से विवाह नहीं कर सकता जब तक कि वों दूसरे आदमी से शादी नहीं कर लेती, शादी करते है, तलाक लेते है और अलग-अलग अवधि “ईददत” नाम से जानी जाती है. Polygamy का अर्थ होता है एक समय में एक से अधिक पत्नी का होना.

क्यूँ किया महिलाओं ने विरोध ?

ट्रिपल तलाक बिल को रोकने और उसे हटाने के लिए हजारों की संख्या में औरतों ने इसके खिलाफ नागपुर में धरना दिया. उन्होंने इस बिल को महिलाओं के खिलाफ और anti-परिवारवादी करार दिया. उनका नारा था “ट्रिपल तलाक बिल वापस लो वापस लो”. उनका ये संदेश था की वे पुरानी परंपरा से खुश है और उन्हें इसमें कोई सुधर की जरुरत नहीं है. उनका ये भी कहना था की वों Shariah के नियम और कानून से सहमत रखती है. उन्होंने आगे कहा हम महिलाएं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ है. हम मुस्लिम महिलाएं इस्लामी कानून में सुरक्षित हैं.

क्या सच में महिलाओं को ट्रिपल तलाक से कोई दिक्कत नहीं या कोई कारण है?. उन्हें सामने आना एक विरोध नहीं अपना विचार है जो सरकार को लोगो के बीच रखना चाहती है. या मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से दवाब है. जब ट्रिपल तलाक का फैसला आया था तब बहुत सी मुस्लिम महिलाओं ने इसका सहयोग किया था और इसके साथ-साथ कोर्ट का इसके साथ धन्यवाद भी किया था.

प्रमुख बिंदु :-

  • ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने.
  • नागपुर में ट्रिपल तलाक पर दिखा महिलाओं में विरोध.

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