वाम दलों ने त्रिपुरा में दो दशकों से अधिक समय शासन किया और इसके बाद शनिवार को बीजेपी ने उन्हें हराया. भाजपा ने जो उत्साह जताते हुए जीत की ख़ुशी  मनाई और जश्न भी मनाया, भाजपा के लिए यह एक बड़ी नैतिक जीत थी. त्रिपुरा में Belonia शहर में Vladimir Ilyich Ulyanov की प्रतिमा थी, जिसे Lenin के रूप में जाना जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक त्रिपुरा में चुनाव नतीजे के 48 घंटों के भीतर, बीजेपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कॉलेज स्क्वायर के केंद्र में भीड़ मे जमा हुए.

पिछले पांच सालों से वहां खड़ी लेनिन प्रतिमा को नीचे की ओर लाया. जेसीबी की मदद से और भारत माता की जय की गूंज के बीच, प्रतिमा को नीचे लाया लाया गया .क्या यह वामपंथ का पतन आ चुका हैं? बिल्कुल चुनाव से तो यही पता चलता हैं.

वामपंथियों के इस राजनीतिक शीत युद्ध के तत्काल विवादित घटना को ”Communism phobia’ कहा

वामपंथियों के इस राजनीतिक शीत युद्ध के तत्काल विवादित घटना को ”Communism phobia’ कहा. भाजपा ने यह कहकर प्रतिक्रिया व्यक्त की कि प्रतिमा उन लोगों द्वारा लाया गया, जिनपर वामपंथी ने दमन किये थे. CPI(M) के Belonia उप-विभागीय सचिव Tapas Dutta ने इस बात की निंदा करते हुए कहा कि मूर्ति गिरने के बाद सिर तोड़ दिया गया. बीजेपी कार्यकर्ता ने तब Lenin के सिर के साथ फुटबॉल खेला.

त्रिपुरा में वामपंथी के पतन के साथ-साथ विशालकाय प्रतिमा मूर्ति को भी किया गया धराशायी

रिपोर्ट की माने तो जेसीबी के चालक को बाद में गिरफ्तार किया गया. हालांकि बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया. प्रतिमा को अब हटा दिया दिया गया हैं. इसके साथ-साथ भंडारण के उद्देश्य के लिए नगरपालिका को सौंप दिया. यह प्रतिमा स्थानीय कलाकार कृष्ण देवनाथ द्वारा 3 लाख रुपये की लागत से बनाई गई थी. विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 2013 में वामपंथी 21 वर्ष के शासन को मनाने के लिए इस मुर्ति की स्थापना की गयी था. क्या यह किसी अन्य पार्टी की  साजिश हैं जैसे बीजेपी ने हाल में ही चुनाव जीता हैं?.

यदि यह लोगों के सामने हुआ तो पुलिस उन इकट्ठे हुए लोगों से पूछ सकती हैं. जो गवाही दे सकते हैं, क्योंकि उन्होनें अपनी आँखों से ऐसा होते हुए  देखा हैं.कौन किसके लिए जिम्मेदार है? राष्ट्र यह जानना चाहता हैं कि यह सब किसने किया, किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी किसके खिलाफ नहीं ? बिल्कुल बीजेपी ने वामपंथ के बड़े शासन के बाद चुनाव जीता लेकिन क्या हम किसी भी उचित साक्ष्य के बिना भाजपा को दोषी ठहरा सकते हैं? यह सच नहीं हैं कि अंतिम फैसले लेने तक जांच की जाए तो सभी को स्वीकार होगा. यह परिवर्तन का समय हैं. जहां तक उत्तर-पूर्व क्षेत्र का संबंध हैं. दोषी कौन है और कौन नहीं समय के लिए छोड़ देते हैं?.

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