तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है…

 

मुझे आह मंजूर है, आँखों की नमी मंजूर है,

तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है.

यूँ तो चाहत मेरी आसमानों की है,

तुम साथ चलो तो ये जमी मंजूर है.

तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है…

 

ये गिन के मिली हैं मुझे भी तुझे भी,

भरोसा नहीं है इनपर मुझे भी तुझे भी,

कहते हैं ये रुक जाए तो मर जाते हैं,

तुम्हारी बाँहों में हूँ, तो साँस थमी मंजूर है.

तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है…

 

दिल तपन में हो तो जसवात तड़पते हैं,

सुखी आँखों में एहसास तड़पते हैं,

लबों से लब्जों की दुरी में,

हसरतों की हुई गमी मंजूर हैं,

तुम साथ बैठी रहो, तो हर कमी मंजूर है…

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