अरुण गोविल एक ऐसे एक्टर हैं, जो साल 1987 से अब तक भगवान राम की छवि से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

आज राम नवमी है। अरुण गोविल एक ऐसे एक्टर हैं, जो साल 1987 से अब तक भगवान राम की छवि से बाहर नहीं निकल पाए हैं। भले टीवी के फेमस शो ‘रामायण’ को करीब 31 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी अरुण गोविल टीवी के राम के रूप में ही पहचाने जाते हैं। राम का किरदार निभाने के बाद लोग उन्हें असल में भगवान राम मानने लगे थे। वे जहां जाते थे लोग उनके पैर छूने लगते थे। टीवी पर ‘रामायण’ सीरियल देखते समय लोग अगरबत्ती तक जलाने लगे थे। इतना ही उन्हें फिल्मों में भी इसी तरह के रोल ऑफर होने लगे थे, जिसकी वजह से उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली थी। उन्होंने ‘रामायण’ में लक्ष्मण का रोल करने वाले सुनील लाहिड़ी के साथ मिलकर उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की।

एक इंटरव्यू के दौरान खुद अरुण ने यह खुलासा किया था कि आज भी कई जगह उन्हें देखकर लोग हाथ जोड़ने लगते हैं। ऐसा नहीं है कि अरुण ने ‘रामायण’ के अलावा किसी अन्य टीवी सीरियल या फिल्मों में काम नहीं किया है, लेकिन जितनी लोकप्रियता उन्हें राम बनकर मिली वह किसी अन्य टीवी सीरियल या फिल्म से नहीं मिल सकी।

राम नगर में जन्मे थे टीवी के राम
टीवी के राम यानी अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी, 1958 को राम नगर (मेरठ) उत्तर प्रदेश में हुआ था। जब वे मेरठ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने कुछ नाटकों में काम किया था। टीनएज लाइफ उनकी सहारनपुर में बीती। अरुण के पिता चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी करें, लेकिन खुद अरुण ऐसा कुछ करना चाहते थे, जो हमेशा के लिए उनको यादगार बन जाए। इसी के चलते वे बिजनेस के करने के उद्देश्य से मुंबई आ गए और बाद एक्टिंग का रास्ता चुन लिया।

बड़े परदे पर पहला ब्रेक
अरुण को पॉपुलैरिटी भले ही छोटे परदे के राम बनने के बाद मिली, लेकिन उन्हें पहला ब्रेक 1977 में ताराचंद बडजात्या की फिल्म ‘पहेली’ में मिला। उसके बाद उन्होंने ‘सावन को आने दो’ (1979), ‘सांच को आंच नहीं’ (1979) और ‘इतनी सी बात’ (1981), ‘हिम्मतवाला’ (1983), ‘दिलवाला’ (1986), ‘हथकड़ी’ (1995) और ‘लव कुश’ (1997) जैसी कई बॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिका निभाई है।

राम से पहले मिला विक्रमादित्य
रामानंद सागर ने अरुण गोविल को सबसे पहले सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ में राजा विक्रमादित्य का रोल दिया। इसकी अपार सफलता के बाद 1987 में ‘रामायण’ में भगवान राम का रोल अरुण ने निभाया। इस रोल से वे इतने पॉपुलर हुए कि आज भी लोग उन्हें टीवी के राम कहकर ही बुलाते हैं। वैसे, अरुण ने ‘लव कुश’ (1989), ‘कैसे कहूं’ (2001), ‘बुद्धा’ (1996), ‘अपराजिता’, ‘वो हुए न हमारे’ और ‘प्यार की कश्ती में’ जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में काम किया है।

अरुण की फैमिली
अरुण अपने पिता की आठ संतानों (6 बेटे और दो बेटियां) में चौथे नंबर पर आते हैं। उनकी पत्नी का नाम श्रीलेखा गोविल है। अरुण और श्रीलेखा की दो संतानें हैं। बेटे का नाम अमल और बेटी का नाम सोनिका गोविल है।

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