उन्नाव – कठुआ और अब एटा – मासूमों का बलात्कार और हत्या

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बलात्कार

एटा में शादी समारोह में जब परिवार और रिश्तेदार वरमाला देख रहे थे, उस समय टेंट हॉउस का कर्मचारी सोनू जाटव 7 साल की बच्ची के साथ हैवान बना बलात्कार कर रहा था. और जब उसने अपनी हवास मिटा ली तो बेकसूर बच्ची को मौत के घाट उतार दिया.

फिर एक मासूम ने गवाई आन और जान

बलात्कार

अभी उन्नाव और कठुआ की आग देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे पर पहुंची ही थी की एक और मासूम को अपनी जान गवानी पड़ी. भारत में कानून का डर इस तरह ख़त्म होता जा रहा है जैंसे किसी को पता ही नही है की बलात्कार कोई अपराध है, और बलात्कार के बाद किसी को जान से मार देना कोई गुनाह.

जब कुछ देर तक बच्ची नही मिली तो माँ बाप उसे तलाश करते हुए एक अधबनी बिल्डिंग के पीछे पहुंचे जहाँ उनके कलेजे का टुकड़ा आखरी सांसे गिन रहा था.

  • उस मासूम के आधे कपड़े नही थे
  • उसके पेट पर खून लगा हुआ था
  • गले पर गला घोंटने के निशान थे
  • हॉस्पिटल में डॉक्टर ने उस मृत घोषित कर दिया
  • पोलिस ने सोनू को गिरफ्तार कर लिया
  • 302, 376 का केस लगा दिया

लेकिन अब क्या?

सिर्फ आरोपी को पकड़ो, केस चलाओ और कुछ दिन बाद भूल जाओ. कब तक हम अपनी बेटियों को इस तरह हवस का शिकार बनते देखते रहेंगे?

देश का हर एक इन्सान इस हैवानियत के बदले मौत की सजा चाहता है, चाहे वो कोई भी हो. कम से कम निर्दोष बच्चों को तो इंसाफ मिलने में देर नही लगनी चाहिए. केंद्र सरकार को चाहिए की वो तुरंत इस घोर अपराध के लिए कानून में संसोधन कर, केस के निपटान की समय सीमा कुछ दिनों में सिमित करे और दोषी को मौत की सजा देना सुनिश्चित करे.

एक तरफ बेटी बचाओ आन्दोलन करके राजनितिक समीकरण सुधारने में लगे नेताओं को अब होश में आना चाहिए की जिसने जन्म नही लिया उस बेटी को संसार में लाकर भी क्या करोगे, जब उसकी आन और जान के दुश्मनों को न पहचान पा रहे हो न ही उन्हें सजा दे पा रहे हो.

मासूमों के बलात्कार के लिए सिर्फ और सिर्फ मौत की सजा होनी चाहिए…. और कुछ नही!

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