एनजीओ ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल जो एक विश्वस्तरीय गैर-सरकारी संगठन है, जो दुनिया भर में भ्रष्टाचार का अध्ययन करता है ने २०१७ के लिये नयी सूची जारी की है. इस नई सूची में भ्रष्टाचार के मामले में भारत को चीन और भूटान से ऊपर दिखाया गया है. इससे पता चलता है इन तीनों देशो की तुलना मे भ्रष्टाचार के मामले में भारत ऊपर है. जैसा भी हो, इसके प्रदर्शन को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर माना गया है.

आंकड़ो के अनुसार

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को सन 2017 में 40 अंकों के साथ 81 वें नंबर पर भ्रष्टाचार सूची में रखा है. जब भारत के अन्य पड़ोसी देशों की बात आती है, पाकिस्तान 117 वें स्थान पर, बांग्लादेश 143 वें स्थान पर, म्यांमार 130 वें और श्रीलंका 91 वें स्थान पर है. कम भ्रष्टाचार की द्रष्टि से भूटान 67 अंक स्कोर कर कर भ्रष्ट देशो (corrupt countries) की सूची में 26 वें स्थान पाता है. चीन 41 अंकों के स्कोर के साथ भ्रष्ट देशो (corrupt countries) की सूची में 77 वें नंबर पर है. मतलब चीन को भ्रष्टचार के मामले में भारत की तुलना में बेहतर माना गया है.

संस्था की भ्रष्ट देशो (corrupt countries) की सूची में रूस को १३५ वे नंबर पर रखा गया है.  इसके अनुस्सर भारत के मुकाबले रूस में भ्रष्टचार की स्थिति काफी ख़राब है. वंहा की सरकार को प्रभावित करने वाली वहां की भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों पर भी इसमे टिपण्णी की गयी है.

विश्लेषण

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडेक्स की सूची में रूस ने २९ अंक प्राप्त किये है. इस सुची के अनुसार शुन्य से १०० अंको के बीच शुन्य अंक उस देश के लिये है जहां भ्रष्टचार सब से अधीक है एवं १०० अंक अधिकतम साफ़ सुथरे देशो के लिये है.  इस सूची के अनुसार, न्यूजीलैंड ने 89 अंकों के साथ सूची में शीर्ष पर है. ८८ अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त करने वाला देश डेनमार्क है.  वही फ़िनलैंड ८५ अंक स्कोर कर के भ्रष्टाचार की लिस्ट में तीसरे नंबर पर है.

सीरिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान को क्रमशः 14, 9, 12 देकर सब से भ्रष्ट देशो में गिना गया है. 2016 के अध्ययन में लिस्ट में भारत के तीन करिबीयो बेलारूस, चाइना और ब्राज़ील में से बेलारूस ४४ अंक प्राप्त कर के ६८वे स्थान पर पहुचं गया है, चाइना ४१ अंक प्राप्त कर के ७७ वे स्थान पर पहुचं गया है, ब्राज़ील ३७ अंक प्राप्त कर कर ९६वे पायदान पर रुड़क गया है. मतलब बेलारूस एवं चाइना में भारत के मुकाबले कम भ्रष्टाचार पाया गया है, जब की ब्राजील में भारत के मुकाबले भ्रष्टाचार थोड़ा ज्यादा है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने क्या टिपण्णी की

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को भ्रष्टाचार और भारत-प्रशांत क्षेत्र में प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर सबसे कमजोर देशों के रूप में दर्जा दिया है.

संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलीपींस, भारत और मालदीव जैसे देशों में न केवल भ्रष्टाचार ज्यादा है बल्की वहां पत्रकारों की हत्याओ की घटनाएं भी ज्यादा पाई गयी है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने कहा, “क्षेत्र के कुछ देशों (एशिया प्रशांत) में, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, विपक्षी नेताओं और यहां तक ​​कि कानून प्रवर्तन या निगरानी एजेंसियों के कर्मचारियों को भी डराया जाता है, और सबसे खराब मामलों में, यहां तक ​​कि हत्या भी हुई”.

“विश्लेषण, जिसमें रक्षा समिति के आंकड़ों को शामिल किया गया है, यह दर्शाता है कि सूचकांक पर 45 या उससे कम अंक वाले जो देश थे उनमे पिछले ६ वर्षों में, 10 पत्रकारों में से ९  से पत्रकारों की ह्त्या हो जाना पाई गयी है.”

“फिलीपींस, भारत और मालदीव इस क्षेत्र में सबसे खराब अपराधिक क्षेत्रो में से है. इन देशों में भ्रष्टाचार का स्तर बहुत ज्यादा है, कम प्रेस स्वतंत्रता है, और पत्रकारों की मौतों के मामले भी ज्यादा हैं.”

भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर किसी भी कार्यकर्ता या रिपोर्टर को अपने जीवन का डर नहीं होना चाहिए. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक पेट्रीश्या मोरेरा ने कहा कि दुनिया भर में सिविल सोसायटी और मीडिया दोनों पर मौजूदा ज्यादतीयो को देखते हुए, हमें उन लोगों की रक्षा करने की जरूरत है जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध बोलते हैं. “

सब से अधिक एवं सब से कम भ्रष्ट देश

भ्रष्ट देशो (corrupt countries) की सूची के शीर्ष पर देश: न्यूज़ीलैंड और डेनमार्क 90 के अंक के साथ प्रथम स्थान पर है, फिनलैंड तीसरे, स्वीडेन चौथे, स्विट्जरलैंड पाँचवें, नॉर्वे छ्टे, सिंगापुर सातवे, नीदरलैंड आठवे, कनाडा नोवे, एवं जर्मनी 10 वीं स्थान पर दर्शाए गए.

भ्रष्ट देशो (corrupt countries) की सूची निचले भाग में दिखाए गए देश: सोमालिया एक सबसे भ्रष्ट देश के रूप में दिखाया गया है, इसी तरह से नीचले स्थान पर दिखाये गए देशों में सीरिया, दक्षिण सूडान, उत्तर कोरिया, अफगस्तरिस्तान, और इराक भी शामिल है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल एक परिचय

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 1993 में स्थापना हुई थी. कुछ लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई शुरू करने का फैसला किया और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के विचार ने आकार लेना शुरू कर दिया. अब 100 से अधिक देशों में  इसकी उपस्थिति है. यह संस्था लोगो में जागरूकता पैदा करने की कौशिश करती है और पुरी दुनिया में चल रहे भ्रष्टाचारो एवं अपराधो के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरणा देती है. यह एक गैर-सरकारी एवं गैर-लाभकारी संगठन है.

इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक भ्रष्टाचार से लड़ना और अपराधो को रोकना है. कानूनी तौर पर यह जर्मनी से पंजीकृत स्वयंसेवी संघ है और यह एक छाता संगठन के रूप में कार्य करता है. 2016 के ग्लोबल गो टू थिंक टैंक इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांस्प्रेन्सी इंटरनेशनल टॉप थिंक टैंक वर्ल्डवाइड (गैर-यूएस) श्रेणी में 100 में से नवें और टॉप थिंक टैंक वर्ल्डवाइड (यूएस और गैर -US) श्रेणी में १०० में से २७ वे नंबर पर रही.

 

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