कभी सोचा है की हमें किसी से शिकायत क्यों हो जाती है, जबकि कुछ दिन पहले तक वो हमारे लिए बहुत अच्छा इन्सान था. बात ये है कि हम जीवन की भाग दौड़ में अनगिनत लोगों से मिलते हैं, उनसे रिश्ते जोड़ते हैं और फिर कुछ ऐसा होता है की हमें उनसे काफी सारी शिकायतें होने लगती है. भाई! वो इन्सान हमारी पसंद का था तभी तो हमारा करीबी बना, फिर उससे शिकायत क्यों?

आज हम बात करेंगे इसी शिकायत वाली भावना की. ये शिकायत क्यों होती है?

कभी आपने सोचा है आपको जो कुछ भी इस जीवन में मिला रहा है वो –

शिकायत

  • आपको ही क्यों मिल रहा है?
  • उससे अच्छा क्यों नही मिला?
  • कुछ समय पहले क्यों नही मिला?
  • इतना क्यों मिला?
  • इस रूप में ही क्यों मिला?

इन सभी सवालों के जवाब लगभग दो शब्दों में छुपे हैं और वो क्या है आज हम जानने की कोशिश करते हैं.

आपको मिलने वाले हर सुख और दुःख का एक मात्र कारण है आपके “कर्म”

आपके सुख दुःख और उनसे जुडी हर एक शिकायत के होने का समय और सीमा का निर्धारण होता है आपके कर्म फल से.

ये सब कुछ आपके खुद के कर्म फल है जिनके कारण ये सब कुछ आपको मिला है. सो इतना समझ लीजिए की आपके इस जीवन की हर एक घड़ी में मिलने वाली हर अच्छी और बुरी स्थिति आपके खुद के द्वारा कमाई गई दौलत का हिस्सा है.

आपने जो कर्म बीज अपने समय के गर्भ में बोए हैं, वही अंकुरित होकर आपके जीवन पथ में सामने आते जाते हैं.

कर्म को कैसें समझे

जैंसे अगर आपका बेटा मोहल्ले की किसी बच्चे के साथ झगड़ा करके घर आए और पीछे से उस बच्चे की माँ आ जाए, तो सबसे पहले उसके मुंह से जो बात निकलेगी वो होगी –

“देखिये आपके बेटे ने मेरे बेटे से झगडा किया”

यहाँ मुख्य शब्द है – “आपके बेटे ने”.

जो बेटा आपका है उसके हर ब्यवहार और हरकत के जिम्मेदार आप होते हैं, क्योंकि आपने उसे पैदा किया है, वो आपकी परवरिश में पला हुआ है, सो सब यही मानते हैं की उसमे जो कुछ भी है आपका ही है.

बस इसी तरह आपके कर्म है, उनके फल से जो कुछ भी आपको मिल रहा है उसके एक लौते जिम्मेदार आप हैं. जब आप जिम्मेदार हैं तो किसी और से किस बात की शिकायत?

शिकायतें शायद ये हो सकती हैं जैंसे कि:

शिकायत

  • आपको किसी ने धोखा दिया
  • आपकी चोरी की
  • आपके हाथ से कोई प्रोजेक्ट छीन लिया
  • आपको गलत लोगों से मिलवा दिया
  • आपसे किया हुआ वादा तोड़ दिया
  • आपसे झूठ बोला
  • आपके सामने नई दुकान खोल ली
  • आपका प्रेम छीन लिया
  • आपकी मंगनी तुडवा दी
  • आपका तलाक करवा दिया

ऐसी कई सारी शिकायतें आपको कई लोगों से हो सकती हैं, पर आपके किसी भी अहित के लिए कोई भी व्यक्ति नही वरन आप खुद जिम्मेदार हैं. सो अपनी कमाई हुई समस्याओं के लिए दूसरों से शिकायत कर बंद कीजिए.

 आपके साथ बुरा क्यों होता है

क्योंकि आपने कभी न कभी किसी न किसी के साथ बुरा किया होगा. आपका जीवन केवल आपके कर्मो की परछाई है, इससे ज्यादा कुछ सोचने की बिलकुल भी जरुरत नही है. अगर आप इस बात को समझ जाएँगे की हर अच्छे बुरे के लिए आप खुद जिम्मेदार हैं तो यकीं मानिये आपको अपनी शिकस्त पर भी हंसी आएगी.

शिकायत

आप जब जीतेंगे तो अहम् नही होगा और जब हारेंगे तो संताप नही होगा.

 

अगले लेख में पढ़िये कर्मों का निर्धारण कैसें होता है? तब तक जीवन में आने वाली हर अच्छी बुरी स्थिति के लिए तैयार रहिये, क्योंकि ये आपकी कमाई का फल है, मतलब कर्म फल है.

“हरी हर”

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